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बंजर जमीन पर लगाए थे पौधे, 5 साल बाद पेड़ों से मिले 25 लाख के आम

3 वर्ष पहले
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वर्ष 2011-12 व 2012-13 में करतला ब्लाॅक के दो दर्जन से अधिक गांव के आदिवासी किसानों की मेहनत अब साकार होने लगी है। किसानों ने ऐसी जमीन को अपनाया जो कई पीढ़ियों से बंजर थी। अब वही जमीन उपजाऊ हो चुकी है। अंतरवर्तीय फसल लेने के साथ ही लंबे समय तक फायदा मिले इसलिए गांव के किसानों ने 5 साल पहले 1-1 एकड़ बंजर भूमि में उन्नत किस्म के 25-25 दशहरी आम के पौधे रोपे थे। वह अब वृक्ष बनकर फल देने लगे हैं। अब तक 25 लाख रुपए तक का आम बाजार में बेच चुके हैं।

करतला में नाबार्ड बाड़ी विकास परियोजना का लाभ 1925 किसान ले रहे हैं। जिसमें से 5 साल पहले से जुड़े 525 किसानों को लाभ मिलने लगा है। इन किसानों ने अपने-अपने स्वामित्व की बंजर भूमि पर 13125 आम के पौधे रोपे थे। 5 साल में पहली बार पेड़ों में इतना फल लगा कि सभी ने मिलकर 25 लाख रुपए तक की मार्केटिंग कर चुके हैं। लाभ लेने वाले किसान 26 गांव से हैं।

अब 26 गांवों के किसान ले रहे हैं फसल का लाभ

आम को वाहन में लोडकर बाजार में ले जाने की तैयारी करते ग्रामीण।

हर साल बढ़ेगी फलों की मात्रा: उन्नत प्रजाति का होने के कारण अलग विशेषता है। वृक्ष फल आने के बाद आगामी वर्षों में लगातार मात्रा दोगुनी होती जाती है। पहले साल अगर किसान को 3-4 क्विटंल फल मिला है तो वह अगले साल 6-7 क्विंटल तक हो जाएगा। हर साल यह आंकड़ा बढ़ता जाता है। इससे किसानों को लाभ भी उसी अनुपात में दो गुना बढ़ता जाएगा।

भास्कर संवाददाता। कोरबा

वर्ष 2011-12 व 2012-13 में करतला ब्लाॅक के दो दर्जन से अधिक गांव के आदिवासी किसानों की मेहनत अब साकार होने लगी है। किसानों ने ऐसी जमीन को अपनाया जो कई पीढ़ियों से बंजर थी। अब वही जमीन उपजाऊ हो चुकी है। अंतरवर्तीय फसल लेने के साथ ही लंबे समय तक फायदा मिले इसलिए गांव के किसानों ने 5 साल पहले 1-1 एकड़ बंजर भूमि में उन्नत किस्म के 25-25 दशहरी आम के पौधे रोपे थे। वह अब वृक्ष बनकर फल देने लगे हैं। अब तक 25 लाख रुपए तक का आम बाजार में बेच चुके हैं।

करतला में नाबार्ड बाड़ी विकास परियोजना का लाभ 1925 किसान ले रहे हैं। जिसमें से 5 साल पहले से जुड़े 525 किसानों को लाभ मिलने लगा है। इन किसानों ने अपने-अपने स्वामित्व की बंजर भूमि पर 13125 आम के पौधे रोपे थे। 5 साल में पहली बार पेड़ों में इतना फल लगा कि सभी ने मिलकर 25 लाख रुपए तक की मार्केटिंग कर चुके हैं। लाभ लेने वाले किसान 26 गांव से हैं।

बरतोरी विकास शिक्षण समिति ने किया प्रोत्साहित

नाबार्ड बाड़ी विकास प्रोजेक्ट से ग्रामीणों को जोड़ने व उन्हें उन्नत तकनीक की खेती के साथ उनके बंजर भूमि का लंबे समय तक लाभ मिले इसके लिए ग्राम बरतोरी विकास शिक्षण समिति सूर्यकांत सोलखे व उनके जमीनी कार्यकर्ताओं ने प्रोत्साहित किया।

थोक के बजाय सीधे बाजार में बेच रहे हैं अपनी फसल

बोतली के रामसिंह राठिया, नवापारा के चरनजीत, बड़मार के शिवकुमार राठिया, कोई के भुवन सिंह ने बताया कि इस बार बेहतर पैदावार हुई है। बेहतर लाभ मिले इसके लिए मंडी में उचित दर नहीं मिल रहा है। जिसके कारण हर दिन किसी न किसी गांव में लगने वाली साप्ताहिक बाजारों में दुकान लगाकर बेच रहे हैं।

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