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शहर के आस-पास जमे 77 शिक्षकों ने पदोन्नति लेने से किया इनकार

3 वर्ष पहले
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मिडिल स्कूलों में हेडमास्टर के रिक्त पद पर भर्ती के लिए 289 उच्च श्रेणी शिक्षक को पदोन्नति का लाभ देने के लिए काउंसलिंग की गई। 77 शिक्षकों ने पदोन्नति लेने से इनकार कर दिया है। मनचाहे स्कूल में पहले से ही जमे होने की वजह से अधिक वेतन को ठुकरा दिया है। 200 स्कूल में हेडमास्टर के पद अब भी खाली हैं। दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों के पदस्थ होने से इनकार करने के कारण आगे नए शिक्षकों को मौका मिलेगा। स्कूलों में कार्यालयीन व अध्यापन व्यवस्था को नियंत्रित रखने के लिए हेडमास्टर की नियुक्ति जरूरी है। 300 मिडिल स्कूल में प्रभारी हेडमास्टर के भरोसे स्कूलों का संचालन हो रहा था। नए शैक्षणिक सत्र 2018-19 में शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए 289 उच्च श्रेणी शिक्षकों को पदोन्नति दी गई। पदोन्नति के बाद शिक्षकों को उनके पसंदीदा जगह चयन करने के लिए काउंसलिंग भी की गई, जिनमें 21 शिक्षक अनुपस्थित रहे। पदस्थापना के लिए पहुंचने वाले 268 शिक्षक ने पदोन्नति नहीं ली। पदोन्नति नहीं लेने वालों में ऐसे शिक्षकों की संख्या अधिक है, जो पहले से अपने गृह ग्राम अथवा आस-पास के गांव में यूडीटी शिक्षक के पद पर पदस्थ हैं। शिक्षकों के पदोन्नति से इनकार के चलते स्कूलों की दशा पूर्ववत बनी हुई है। जिला शिक्षा अधिकारी डीके कौशिक ने बताया कि हेडमास्टर के लिए 289 शिक्षक की पदोन्नति सूची जारी की गई थी। 56 शिक्षक ने पदोन्नति नहीं ली है व 21 शिक्षक काउंसलिंग में नहीं पहुंचे थे। शैक्षणिक सत्र से पहले रिक्त पदों में नियुक्ति कर ली जाएगी।

वनांचल के स्कूलों में अधिक समस्या

वनांचल गांवों में उपस्थिति-अनुपस्थिति को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारी निरीक्षण नहीं करते। निरीक्षण में उपेक्षा किए जाने से गांवों शिक्षा का स्तर खराब है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले अतिरिक्त शिक्षकों की भी पदोन्नति के सूची जारी होगी। दूरदराज के क्षेत्र में शिक्षकों के जाने से शिक्षा की दशा में सुधार होगी।

टैबलेट से शिक्षकों पर नजर रखेंगे

हेडमास्टर की नियुक्ति नहीं होने से स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति नहीं रहती। पहुंच विहीन होने से स्कूलों में मनमानी बनी रहती है। उपस्थित के लिए बायोमेट्रिक टैबलेट प्रदान किए गए हैं, जिसके ऑपरेट करने की जानकारी से शिक्षक अंजान हैं। अभी भी 500 स्कूलों में टैबलेट का आवंटन बाकी है।

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