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कन्हैया जैसी लीला कोई भी नहीं कर सकता: तिवारी

3 वर्ष पहले
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सीएसईबी सुपर एफ कॉलोनी में श्रीमद भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग आचार्य ने सुनाया। भगवान के जन्म प्रसंग के दौरान श्रद्धालु बधाई गीतों पर जमकर झूमे।

कथा व्यास शास्त्री पंडित मुकेश तिवारी ने श्रीकृष्ण लीला का वर्णन करते हुए श्रोताओं को प्रेम, वात्सल्य व भक्ति रस का महात्म्य बताया। उन्होंने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि कन्हैया जैसी लीला मनुष्य क्या कोई अन्य देव नहीं कर सकता। लीला व क्रिया में अंतर होता है। भगवान ने लीला की है। जैसे जिसको कर्तव्य का अभिमान तथा सुखी रहने की इच्छा हो तो वह क्रिया कहलाती है। जिसको न तो कर्तव्य का अभिमान है और न ही सुखी रहने की इच्छा हो बल्कि दूसरों को सुखी रखने की इच्छा को लीला कहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने यही लीला की जिससे सभी गोकुलवासी सुखी थे। उन्होंने कहा कि माखन चोरी का रहस्य मन की चोरी से है। कन्हैया ने अपने भक्तों के मान की चोरी की है। इस प्रकार उन्होंने तमाम बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए बैठे श्रोताओं को वात्सल्य प्रेम में सराबोर किया। समुद्र मंथन, राजा बलि व वामन अवतार की कथा का वर्णन भी इस अवसर पर किया गया। उन्होंने ग्राह्य और गजेंद्र मोक्ष के प्रसंग में कहा कि भगवान की निश्छल भक्ति से ऐसा संभव हो सका। वृत्तासुर को परमगति भी सिर्फ इसलिए मिली क्योंकि उसकी भावना कोई खास चाह की नहीं, अपितु भगवान या उनके भक्तों की शरण की अभिलाषा थी। कई बिंदुओं के माध्यम से उन्होंने लोगों से व्यावहारिक, सदाचारी, सत्यव्रती बनने की अपेक्षा की। मौके पर पंडित शिवराज शर्मा, पंडित प्रभात शर्मा के भजनों की प्रस्तुति के साथ आचार्य तिवारी ने कहा कि मनुष्य के कर्म व गुण के आधार पर ही उसे हर कहीं मान सम्मान प्राप्त होता है। इसलिए प्रयास किया जाए कि हर हाल में अच्छे कर्म करें ताकि इहलोक के साथ परलोक भी बेहतर हो।

सीएसईबी कॉलोनी में श्रीमद् भागवत कथा, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर झूमे श्रद्धालु

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