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अस्पृश्यता से अपमान नहीं हुआ सहन उसे देश से ही समाप्त कर दिया: रामबिलास

3 वर्ष पहले
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डॉ. भीमराव अंबेडकर अपनी कुसाग्रता के कारण देश ही नहीं विश्व में अपनी पहचान बना चुके थे। भारत में चारों तरफ वर्ग भेद व समाज को लेकर लोगों में आपसी तालमेल नहीं था। जिसका फायदा शासकों ने उठाया।

उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद एक समय ऐसा आया जब उन्हें भारत में एक राजा के यहां काम करना पड़ा। जहां अस्पृश्यता के कारण उन्हें काफी अपमानित होना पड़ा और उन्होंने काम छोड़कर देश में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने आगे आए और संविधान बना डाले। जिसके कारण वर्ग व जाति भेद दूर हुआ। यह बात राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के जिला कार्यवाह रामबिलास ने महर्षि वाल्मिकी आश्रम, आईटीआई रामपुर में आयोजित अंबेडकर जयंती पर कही। उन्होंने अंबेडकर की जीवनी पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अंबेडकर ने स्वयं कहा था कि वे श्रेष्ठ हिन्दू समाज का अंग हैं, हिन्दू एक व्यापक शब्द है जिसकी विवेचना आसान नहीं। हिन्दू धर्म जो विश्व का पुरातन धर्म है वहां आज अश्पृश्यता का नाम सुनने को नहीं मिलता। बाबा साहेब ने इस देश को संविधान दिया, समाज सुधार के अनेकों कार्य किए। देश के हित में उनके कार्य को देख कर भारत सरकार ने भारत र| की उपाधि दी। रामबिलास ने सभी आग्रह किया कि डॉ.अंबेडकर के विचारों को आत्मसात करते हुए समाज में व्याप्त अश्पृश्यता को समाप्त कर समाज के सभी लोगों को जोड़कर बेहतर समाज का निर्माण करें।

कार्यक्रम के शुरू में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के तैल चित्र में माल्यर्पण कर उन्हें याद किया गया। इस अवसर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नगर संघचालक एसके अग्रवाल, नगर कार्यवाह विष्णु मिश्रा, धर्मजागरण के कार्यकर्ता, संघ के स्वयंसेवक, जिला प्रचारक समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।

शासकों ने आपसी तालमेल नहीं होने का उठाया फायदा

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