बालको प्रबंधन ने एक बार फिर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) लागू की है। जिसका श्रमिक संगठन यह कहते हुए विरोध कर रहे हैं कि एक ओर बालको अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए नया स्मेल्टर बनाने जा रहा है। जिसमें अनुभवी कर्मचारियों की जरूरत के साथ-साथ बड़ी संख्या में कामगार लगेंगे। दूसरी तरफ प्रबंधन इसी दौरान नई वीआरएस ले आया है।
भारत एल्यूमिनियम श्रमिक संघ के महामंत्री राकेश सोनी ने बालको के सीईओ को एक पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा है कि अनेक कर्मचारियों को 22 मई से जिला अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण के लिए पत्र लिखा गया है। इस पत्र में उल्लेखित है कि वे जहां पर काम करते हैं वहां कार्य करने के योग्य उनकी सक्षमता को मेडिकल बोर्ड से प्रमाणित किया जाना है। एक ओर बालको का खुद का हास्पिटल है, जहां परीक्षण की बजाए जिला अस्पताल में परीक्षण किया जाना अपने आप में ही सवाल खड़ा करता है। यह कार्रवाई कर्मचारियों को भय में डालकर बलपूर्वक निष्कासित करने के लिए की जा रही लग रही है। जबकि बालको विनिवेश के समय हुए समझौते में कहा गया था कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति कर्मचारी को उसके स्वेच्छा व विवेक पर ही होनी चाहिए। बालको प्लांट में वर्षों से काम कर रहे अनेक कर्मचारियों को विभिन्न बीमारियां इस वजह से भी होती है क्योंकि प्लांट के उन हिस्से में प्रदूषण होता है। बालको हास्पिटल में आवश्यक डॉक्टर भी नहीं रखे जाते हैं। संघ ने कहा है कि प्रबंधन तत्काल इस कार्रवाई को रोकें अन्यथा आंदोलन के लिए विवश होना पड़ेगा। इसकी जिम्मेदारी प्रबंधन की ही होगी। इधर एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि बालको कर्मचारियों पर कोई दबाव नहीं बना रहा है कि वे वीआर लें। परफारमेंस के आधार पर कर्मचारियों की सेवा के संबंध में निर्धारित नियमों के अनुसार ही निर्णय लिए जाएंगे।