वितरण कंपनी बिजली व्यवस्था सुधारने की कोशिश में लगा हुआ है। कर्मचारियों की कमी के चलते विभाग को परेशानी से जूझना पड़ रहा है। इसे देखते हुए कंपनी ने 2000 सविंदा कर्मचारियों की भर्ती का आदेश जारी किया है। जारी आदेश में कहा गया है कि अंबिकापुर व जगदलपुर के लिए केवल स्थानीय उम्मीद्वारों से ही भर्ती होगी। अन्य जगहों के लिए पूरे राज्य के उम्मीदवार आवेदन कर सकेंगे।
इसके लिए शैक्षणिक योग्यता कक्षा-10 वीं उत्तीर्ण रखी है। 18 से 35 वर्ष उम्र के उम्मीद्वार आवेदन कर सकेंगे। बिजली कंपनी में कर्मियों की कमी बड़ी समस्या है, जिसके कारण विभाग के दूसरे कार्य भी प्रभावित हो रहे हंै। खासकर वितरण विभाग में कर्मचारियों की कमी के चलते बिजली व्यवस्था पर काफी विपरीत असर पड़ रहा है। जिसका खामियाजा विभाग के साथ उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। कंपनी में सैकड़ों पद खाली हंै। मैदानी अमले की कमी के कारण खराबी आने पर विभाग को काफी परेशानी हो रही है।
अंबिकापुर व जगदलपुर के लिए सिर्फ स्थानीय उम्मीदवार
विभाग में कर्मचारियों की कमी को दूर करने वितरण कंपनी की कोशिश।
प्रबंधन ने दिया था आश्वासन: जायसवाल
बीएमएस के प्रदेश महामंत्री राधेश्याम जायसवाल ने कहा कि मैदानी अमले की कमी के मुददे को प्रबंधन के समक्ष प्रमुखता से उठाया गया था। 21 मार्च को प्रबंधन संचालक मंडल की बैठक में भी प्रबंधन ने इसका संकल्प पारित किया था और आदेश जारी करने का आश्वासन दिया था। संगठन के प्रयासों से यह संभव हुआ है।
इन पदों पर होगी भर्ती
क्षेत्रीय कार्यालय पद
रायपुर 560
दुर्ग 108
बिलासपुर 540
राजनांदगांव 252
अंबिकापुर 260
जगदलपुर 280
ये हो रही है परेशानी
कर्मचारियों की कमी के कारण फाल्ट आने पर सुधार में समय लग जाता है। कई गांवों की जिम्मेदारी एक कर्मी के भरोसे है। मैदानी अमले की कमी होने के कारण नियमित लाइन चेकिंग नहीं हो पाती है। खासकर मौसम की खराबी के बाद स्थिति सामान्य होने में हफ्ते भर से अधिक का समय लग जाता है। संविदा लाइन मेन की बड़ी संख्या में भर्ती होने से विभाग को लग रहा है कि कर्मचारियों की कमी का बोझ कम किया जा सकेगा। िजससे बिजली व्यवस्था में भी सुधार होगा।
आऊटसोर्सिंग के काम में खामियां: कंपनी में लंबे समय से कर्मियों की भर्ती नहीं हुई है। मैदानी अमले की कमी से कंपनी अधिकांश कामों में आउटसोर्सिंग का सहारा ले रही है। पर इसके लिए कंपनी को जो लागत चुकानी पड़ रही है। उसके हिसाब से उपभोक्ताओं को लाभ नहीं मिल रहा। वर्तमान में विद्युत सब-स्टेशनों के संचालन, लाइन मेंटनेस सहित विभिन्न योजनाओं के तहत होने वाले काम को आउटसोर्सिंग के माध्यम से कराया जा रहा है।