व्याख्याता पंचायत के 127 पद खाली वनांचल में वह पढ़ाने नहीं जाना चाहते
जिले में शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो पा रही है। पंचायत, व्याख्याता के 88 पद रिक्त थे। 39 पंचायत व्याख्याताओं ने इस्तीफा दिया। इसकी वजह से अब संख्या बढ़कर 127 हो गई है। प्लेसमेंट एजेंसी भी रिक्त पदों को नहीं भर पाई। इसका मुख्य कारण दूरस्थ स्कूलों में पढ़ाने के लिए नहीं जाना है। नए सत्र से हाईस्कूल व हायर सेकेण्डरी स्कूल के छात्र-छात्राओं को शिक्षकों की समस्या से जूझना पड़ेगा।
जिले में स्कूलों की संख्या बढ़ाई जा रही है। उसके अनुरूप शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई है। सीधी भर्ती के तहत जिन शिक्षकों की नियुक्ति शैक्षणिक सत्र 2016-17 में हुई थी उसमें से 39 व्याख्याता शिक्षकों ने इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने की कई वजह है। पहली वजह दूर गांव में शिक्षकों की नियुक्ति है। प्रतिदिन 50 से 60 किलोमीटर की सफर कर पढ़ाई कराने के लिए शिक्षक नहीं जाना चाहते। पदस्थ व्याख्याताओं की नियुक्ति दूसरे सरकारी जॉब में होने व अथवा जिले के निकटर्ती गांव में होने से त्याग पत्र दिया गया है। विडंबना यह भी है कि सीधी भर्ती प्रकिया में उच्च अंक वाले अभ्यर्थी कई जिले में आवेदन करते हैं। ऐसे मंे निचले क्रम के अभ्यर्थियों को प्रतीक्षा सूची में डाल दिया जाता है। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में देरी होती है। शिक्षक बीच में नौकरी न छोंड़े, इसके लिए सरकारी तौर पर अनुबंध भी किया जाता है। इसके तहत शिक्षक को मिलने वाले वेतन राशि की तिगुना राशि पटानी पड़ती है। उक्त बाध्यता के बाद भी व्याख्याताओं ने नौकरी से त्याग पत्र दिया है।
बीएड-डीएड की अनिवार्यता से भर्ती में कठिनाई
ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में अध्यापन कराने प्लेसमेंट एजेंसी को अभ्यर्थी तो मिल रहे हैं, पर बीएड व डीएड की अनिवार्यता से भर्ती कराना संभव नहीं हो रहा है। शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से स्कूलों में विषय शिक्षक की अध्यापन के बिना ही छात्र-छात्राओं को परीक्षा देनी पड़ी। बीएड की अनिवार्यता को शिथिलता देने की मांग शिक्षा विभाग से की गई है, जिसमें शासन की सहमति नहीं होने स्थिति दयनीय बनी है।
अंग्रेजी विषय में सबसे अधिक समस्या
2017-18 में जितने शिक्षकों ने नौकरी से रिजाइन दिया, उनमें 17 व्याख्याता अंग्रेजी विषय के थे। प्लेसमेंट के तहत सत्र भर में जितनों की नियुक्ति की गई उनमें से ज्यादातर शिक्षक विज्ञान विषय के हैं। विषयवार शिक्षक की कमी होने से दीगर से विषय के व्याख्याताओं से कोर्स पूरा कराने की औपचारिकता है।
शिक्षकों की कमी को दूर करने किया जा रहा प्रयास
जिला पंचायत के एपीओ संदीप पाण्डेय ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2017-18 में 39 व्याख्याता शिक्षकों ने नौकरी से इस्तीफा दिया है। रिक्त पदों में प्लेसमेंट के तहत भर्ती की गई। इसके अलावा कई पद पदोन्नति से भर चुके हैं। पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए शिक्षकों की व्यवस्था की जा रही है।