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147 पंचायतों ने नहीं भेजे जन्म -मृत्यु के कागजात, विकास योजना में बनान में होगी समस्या

3 वर्ष पहले
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जिले के 390 में 147 ग्राम पंचायत ने जन्म-मृत्यु का दस्तावेज एक बार भी नहीं भेजा है। ऐसे में जिला सांख्यिकी विभाग राज्य योजना आयोग को रिपोर्ट देने में नाकाम है। प्रति माह पंजीयन दुरूस्त कर जानकारी भेजने की जिम्मेदारी पंचायत सचिवों की है। जन्म-मृत्यु के भेजे गए रिपोर्ट के आधार पर जिला विकास की तैयारी को मूर्तरूप दिया जाता है। जनपदों अधिकारियों का सचिवों पर नियंत्रण नहीं होने के कारण काम अधूरा ही रह गया है।

जन्म-मृत्यु पंजीयन का प्रचार-प्रसार करने में शासन करोड़ों खर्च कर रहा है। इसके बावजूद जिला कार्यालय में रिकार्ड दुरूस्त नहीं हैं। इसकी वजह यह है कि ग्राम पंचायतों से जिला कार्यालय को दुरूस्त दस्तावेज नहीं मिल रहा है। वार्षिक जन्म-मृत्यु पंजीयन के आधार पर किसी भी गांव की वास्तविक जनसंख्या का अनुमान लगाया जाता है। अनुमान के आधार पर विकास के लिए योजना बनाई जाती है। जनसंख्या आंकड़ा नहीं मिलने से योजनाएं पᆬेल हो रही है। गांवों में खोले गए च्वाइस सेंटर बंद हो चुके हैं। पंचायत सचिवों ने दायित्व में रुचि लेना बंद कर दिया है। सांख्यिकी विभाग की ओर से जनपदों को रिपोर्ट भेजने के लिए संज्ञान पत्र लिखा जाता है। अधिकारियों की अनदेखी के चलते पंजीयन काम समय पर नहीं हो रहा है। पिछले कुछ साल में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिला है। ऐसे में बच्चों की जन्म पंजीयन की रिपोर्ट चिकित्सालयों से मिल जाती है। इसके विपरीत मृत्यु दर की जानकारी के लिए सचिव पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में जानकारी नहीं भेजने से रिपोर्ट अधूरी ही रह जाती है।

जनपद अधिकारियों का पंचायत सचिवों पर नियंत्रण नहीं होने से समय पर रिपोर्ट उपलब्ध नहीं हो रहा है। जिला योजना एवं सांख्यिकी अधिकारी मोहन सिंह कंवर ने बताया कि 390 में 147 ग्राम पंचायत ने जन्म-मृत्यु पंजीयन की रिपोर्ट नहीं भेजी है। रिपोर्ट तैयार कर जनपद अथवा जिला कार्यालय भेजने की जिम्मेदारी सचिवों की है। संज्ञान पत्र भेजे जाने के बावजूद भी आंकड़े अप्राप्त हैं। इससे विकास योजना पर असर होगा।

स्कूलों में प्रवेश के लिए हो रही परेशानी
प्रचार-प्रसार के अभाव में अभी भी कई अभिभावक जन्म-मृत्यु पंजीयन से अंजान है। स्कूल में दाखिला पंजीयन प्रमाणपत्र लिखित जन्म तारीख के आधार पर ली जा रही है। ऐसे में जिन अभिभावकों के पास जन्म प्रमाणपत्र नहीं है, उन्हें संबंधित कार्यालय में भटकना पड़ रहा है।

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