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बाल विवाह रोकने विभाग हुआ अलर्ट प्रकरण बना तो पंडित भी जाएंगे जेल

3 वर्ष पहले
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अक्षय तृतीय 18 अप्रैल को है। इस दिन वैवाहिक सीजन भी शुरू हो जाता है। अबूझ मुहूर्त के कारण पूरे जिले में बड़ी संख्या में शादियां होती हैं। ग्रामीण अंचल में तो आर्थिक रूप से कमजोर परिजन अपने बच्चों की कम उम्र में ही शादी करने तैयार हो जाते हैं। जो कानून गलत है। ऐसे बालक व बालिका जो नाबालिग हैं उनकी शादी अक्षय तृतीया पर न हो इसके लिए जिला प्रशासन का एक विभाग सक्रिय हो जाता है। इस बार जिले में ऐसे प्रकरण न बनें इसके लिए तैयारी कर ली गई है। ऐसा कोई प्रकरण जहां शादी हो रही हो सामने आने पर परिजनों के साथ विवाह कराने वाले पंडित भी जाएंगे जेल।

महिला एवं बाल विकास विभाग अक्षय तृतीया पर पूरे जिले में नजर रखने की तैयारी कर चुका है। जिले के साथ ग्रामीण अंचल में काम करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओं के माध्यम से किसी भी गांव या शहर में कम उम्र के बालक या बालिका की शादी न हो इसकी मानिटरिंग शुरू कर दी गई है। इसके लिए विभागीय अमला पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। विभागीय कर्मचारी और कार्यकर्ता गांव-गांव घूमकर लोगों को बता रहे हैं कि बाल विवाह कानून अपराध है, इसलिए कोई भी अपने बच्चों का बाल विवाह न करें।

महिला एवं बाल विकास विभाग जिलेभर में टीम बनाकर रखेगा नजर

अमले को कर दिया है सजग

महिला एवं बाल विकास विभाग कोरबा शहरी परियोजना अधिकारी मनोज अग्रवाल ने बताया कि जिला स्तर पर सभी परियोजनाओं की जमीनी कार्यकर्ताओं को अक्षय तृतीया पर अलर्ट रहने कहा गया है। ताकि कोई बालक या बालिका कम उम्र होने के बाद भी शादी के बंधन में बंध सके। एेेसा मामला सामने पर तत्काल परिजनों को समझाइश दी जाए। नहीं मानने पर कानून का सहारा लेंेगे।

ज्यादा अमला महिला बाल विकास के पास, अन्य अफसर भी रखेंगे नजर

सबसे ज्यादा अमला महिला एवं बाल विकास विभाग के पास है। जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी, 10 परियोजनाओं के परियोजना अधिकारी, 87 सेक्टर सुपरवाइजर व 5 हजार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं की भूमिका ऐसी शादियां रोकने में महत्वपूर्ण होती है। कहीं भी ऐसी सूचना मिलती है तो जिला बाल संरक्षण अधिकारी संबंधित सेक्टर की सुपरवाइजर व पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर वैधानिक कार्रवाई करते हैं। जिला बाल संरक्षण अधिकारी दयादास महंत ने बताया कि इस दिशा में विभाग पहले ही सक्रिय है। पहले से यह परंपरा चली आ रही है कि अक्षय तृतीया पर बाल विवाह अधिक होते हैं इसलिए विभाग की सक्रियता और बढ़ जाती है। अन्य विभागों के अफसर भी इस पर नजर रखेंगे।

1098 पर कर सकते हैं शिकायत

आंगनबाड़ी केन्द्र स्तर पर 15 से 18 वर्ष की किशोरी बालिकाओं की सूची बनाकर सर्वे पंजी से मिलान कर डाटाबेस बीते साल तैयार कराया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कहा गया है कि वे किशोरी बलिकाओं से उनके घर में मिलकर उन्हें व परिजनों को बाल विवाह के दुष्परिणाम व सभा में बाल विवाह की कानूनी जानकारी से अवगत कराते हुए जागरूक करें। अपने कार्यक्षेत्र में बाल विवाह की जानकारी होने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नजदीकी थाने व चाइल्ड लाइन के नंबर 1098 पर अवगत कराने कहा गया है।

8 प्रकरण आ चुके हैं सामने

जनवरी के बाद से अब तक जिले में 8 प्रकरण बन चुके हैं। अधिकांश में लड़की की शादी 18 के बजाय 16 या 17 साल पाई गई थी। जिसके कारण शादी को स्थगित करा दिया गया। 6 मामले तो करतला ब्लाक के ही हैं। जबकि 1 पाली तो 1 पोड़ी उपरोड़ा ब्लाक से सामने आ चुका है। एक दिन बाद आने वाली थी बारात, जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचकर टीम ने बालिग होने तक शादी रुकवा दी थी

परिजनों, बाराती पर भी कार्रवाई

विवाह के लिए लड़की की उम्र न्यूनतम 18 वर्ष व लड़के की 21 वर्ष होनी चाहिए। महिला बाल विकास विभाग रायपुर के सचिव ने इस संबंध में विभाग को पत्र जारी कर कड़ाई से पालन करने कहा है। जिसके अनुसार यदि किसी भी परिवार में बाल विवाह होना पाया जाता है तो उसमें शामिल होने वाले सभी लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिसमेेंं वर-वधु के परिजन समेत विवाह में शामिल होने वाले बाराती, घराती, फेरा लगवाने वाले पंडित व भोजन पकाने वाले हलवाई भी प्रभावित होंगे।

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