वितरण कंपनी में होगी लाइन परिचारकों की भर्ती, तैयारी शुरू
बिजली कंपनी में कर्मचारियों की कमी एक बड़ी समस्या है, जिसके कारण दूसरे कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। कर्मचारियों की कमी के चलते बिजली वितरण व्यवस्था पर काफी विपरीत असर पड़ा है।
कंपनी में लंबे समय से रिक्त पदों पर भर्ती नहीं होने से विभाग के सीमित कर्मचारियों पर बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। जिसे देखते हुए बिजली कंपनी में लाइन परिचारक पद पर भर्ती की तैयारी प्रबंधन की ओर से किया जा रहा है। संविदा कर्मचारियों की भी भर्ती की जाएगी। प्रबंधन ने तीन साल पहले भी रायपुर, दुर्ग एवं बिलासपुर संभाग के अंतर्गत लाइन परिचारक (संविदा) पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरु की थी। जिसमें भू-विस्थापितों को प्राथमिकता दी गई थी। बताया जा रहा है कि प्रबंधन अब मैदानी अमले की कमी को दूर करने के लिए करीब 2000 कर्मचारियों की भर्ती की तैयारी कर रही है। कंपनी के ज्यादातर पुराने कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं। कर्मचारियों की भर्ती की मांग पहले यूनियनों ने भी की थी। जिसके परिणाम स्वरूप दो साल पहले कंपनी ने बड़ी संख्या में लाइन परिचारकों की भर्ती हुई थी। अब फिर से नए मैदानी कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी। बिजली उत्पादन, पारेषण व वितरण कंपनी में सर्वाधिक अधिकारी-कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ट्रेडिंग व होल्डिंग कंपनी में कुछ कम हैं।
कंपनी में जेई की भर्ती प्रक्रिया भी चल रही
एक तरफ प्रबंधन बड़ी संख्या में लाइन परिचारकों की भर्ती की तैयारी कर रही है। वहीं दूसरी तरफ बिजली कंपनी में पदोन्नति के बाद कनिष्ठ पद रिक्त होते जा रहे हैं, इससे कामकाज प्रभावित होने लगा है। प्रबंधन ने इससे निपटने के लिए लंबे अरसे बाद प्रशिक्षु कनिष्ठ तथा सहायक यंत्रियों की भर्ती शुरू कर दी है। तीन कंपनी के लिए 148 सहायक तथा 145 कनिष्ठ यंत्री की भर्ती की प्रक्रिया शुरु की गई है। वर्तमान में उत्पादन, पारेषण तथा वितरण कंपनी में ही प्रशिक्षु सहायक तथा कनिष्ठ यंत्री की भर्ती हो रही है। प्रबंधन ने प्रक्रिया शुरू कर योग्य अभ्यर्थियों से आवेदन मांगा है
वितरण विभाग जूझ रहा कर्मचारियों की कमी से
पावर कंपनी में अधिकारी व कर्मचारियों की संख्या 17 हजार के करीब है। जिसमें क्लास-1 अफसर 827, दूसरे श्रेणी के अधिकारी ा 1326, क्लास-3 ग्रेड के कर्मचारी 8061 व चतुर्थ वर्ग के 7294 कर्मचारी है। जिले में वितरण विभाग में करीब 300 अफसर व कर्मचारी हैं। जिन पर पूरे जिले की बिजली व्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी है। कर्मचारियों की कमी के कारण होने वाली परेशानी को देखते हुए कई बार प्रस्ताव भेजा जा चुका है। लेकिन इसके बावजूद अपेक्षा अनुसार मैदानी स्तर के कर्मचारियो की पूर्ति नही की जा सकी है।