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दुर्गा पूजा आयोजन के लिए बनी थी समिति अब लोगों के सुख-दुख में भी करती है मदद
शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में गली-गली में महिला समिति तैयार हो रही है। कोई स्वालंबन के लिए तो कोई समिति राजनीतिक सहयोग के लिए काम कर रही है। लेकिन बालको नगर के परसाभाठा में महिलाओं की एक ऐसी समिति भी है जो इन सबसे दूर लोगों के सुख-दुख में मदद पहुंचा रही है। 7 साल पहले नवरात्रि मनाने के लिए मां दुर्गा महिला समिति के नाम से गठित इस समिति में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 50 लोग जुड़े हैं। समिति पिछले 3 साल से क्षेत्र में होने वाले गरीब परिवारों के शादी, छट्ठी व दशगात्र में आर्थिक मदद के अलावा नि:शुल्क बर्तन-भाड़ा उपलब्ध करा रही है। इसके अलावा परिवार की सहमति होने पर उनके कार्यक्रम में भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी भी संभालती है। गरीब परिवार के किसी सदस्य की स्थिति गंभीर होने पर भी समिति आर्थिक मदद पहुंचाती है। इस तरह के सामाजिक कार्यो में मदद के लिए समिति की सभी महिलाओं का उनके परिवार के सदस्य पूरा सहयोग करते हैं। खासकर बेटियों की शादी में गरीब परिवार पर ज्यादा भार न पड़े इसके लिए विशेष प्रयास करती है। किसी के निधन होने पर दशगात्र में असक्षम परिवार का सहयोग करते हुए पूरा बीड़ा समिति उठा लेती है।
गरीबों के लिए नि:शुल्क बर्तन व भोजन की उठाती हैं जिम्मेदारी
जरूरतमंदों की मदद करने के साथ शादी-ब्याह के मौके पर खाना बनाते समिति के लोग।
3 साल से चल रही सोशल एक्टीविटी
समिति के संरक्षक डॉ. एमएल चंद्रा ने बताया कि दुर्गा पूजा आयोजन के लिए 7 साल पहले समिति बनाई गई। फिर अपने आयोजन के लिए बर्तन-चादर खरीदे गए। बाद में क्षेत्र मंे लोगों की सुख-दुख के कार्यक्रम में रियायती दर पर जरूरत के सामान को किराए पर देना शुरू किया गया। जैसे-जैसे पैसा जमा होते गया। समिति ने इस तरह के कार्यक्रम में बर्तन-भाड़ा समेत आर्थिक मदद की पहल शुरू की। वहीं ऐसे कार्यक्रम में खाना बनाने से लेकर खिलाने तक की जिम्मेदारी समिति उठाने लगी है।
बर्तन किराया से एकत्रित करते हैं पैसा: सचिव मिथलेश साहू ने बताया कि समिति के सदस्य एक-दूसरे की मदद करने के लिए आगे रहते हैं। इसके लिए सुख-दुख में सभी स्वेच्छा से रूपए जमा करते हैं। समिति की ओर से सक्षम परिवारों को उनके जरूरत पर करीब 2000 रुपए खर्च में मिलने वाले बर्तन-भाड़ा को मात्र 200 रुपए के किराए पर उपलब्ध कराया जाता है। इस किराया से ही पैसा एकत्रित होता है जो लोगोें के सहयोग में खर्च किया जाता है। समिति प्रस्ताव बनाने के साथ ही आपसी सहमति से निर्णय लेती है। इसका लेखा-जोखा रजिस्टर में दर्ज होता है।
50 शादियां, 30 छट्ठी और 5 दशगात्र
समिति की अध्यक्ष सविता देवी साहू के मुताबिक मोहल्ले में निवासरत परिवार में बेटी-बेटा की शादी होने पर समिति के प्रत्येक सदस्य 100-100 रुपए मिला आर्थिक सहयोग करते हैं। नि:शुल्क बर्तन-भाड़ा देकर टेंट में लगने वाला उनका खर्चा भी बचाते हैं। इसके अलावा व्यक्तिगत रूप से अलग उपहार भेंट करते हैं। 3 साल के दौरान समिति ने 50 शादियों समेत 30 छट्ठी मंे इस तरह का सहयोग किया है। शोक कार्यक्रम में गरीब परिवारों पर भार न पड़े इसके लिए 5 दशगात्र कार्यक्रम भी समिति ने अपने खर्चे पर पूरा किया है।
समिति से इन्हें मदद
घर में न जगह था न पैसा, समिति ने उठाया जिम्मा
परसाभाठा मेनरोड निवासी बहादुर ने बताया डेढ़ साल पहले प|ी जमुना देवी की मौत हो गई। दशगात्र करना था। घर मंे न आंगन था न तो पैसा। एेसे में महिला समिति ने उसकी प|ी के दशगात्र की जिम्मेदारी ली। समिति ने दशगात्र भाेज बनवाया। साथ ही अपने घरों में लोगों को भोज कराया।
केस-1
बेटी की शादी में उपहार दिया, भोजन भी बनाया
परसाभाठा के गली नंबर-3 निवासी लालकुमार सिदार ने बताया शनिवार को उसकी बेटी पिंकी की शादी हुई। इस दौरान दुर्गा पूजा महिला समिति ने उपहार के तौर पर आर्थिक मदद की। बारातियों व घरातियों के लिए भोजन भी बनाया। खाना खिलाते समय समिति के सदस्यों ने मदद की।
केस-2
बच्चे की छट्ठी के लिए नहीं था पैसा, समिति ने की मदद
ग्रहण दास ने बताया उनके यहां बच्चे की छट्ठी करने पैसा नहीं था। पहले ही कर्ज लेकर ब्याज तले दबे होने से कोई उधार रकम भी नहीं दे रहा था। ऐसे में महिला समिति ने उनके बच्चे की छट्ठी मनाने में मदद की और अासानी से कार्यक्रम पूरा हुआ।
केस-3