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सीटू बोला- काला फीता लगाकर करेंगे विरोध-प्रदर्शन

3 वर्ष पहले
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कॉमर्शियल माइनिंग के विरोध में कोल इंडिया व उसकी सहायक कंपनियों में 16 अप्रैल को हड़ताल होना था। लेकिन अचानक कोयला मंत्रालय के सचिव के साथ वार्ता के बाद यूनियनों ने हड़ताल वापस ले ली।

इस मीटिंग के बाद से ही हड़ताल के मुद्दे पर एकजुट होने की बात कहने वाले चारो यूनियनों के बीच दो फाड़ हो गया। कर्मी इसे सरकार की सफलता और यूनियनों की हार बता रहे हैं। दूसरी तरफ सीटू ने दो टूक कहा कि हड़ताल वापस लेने वाले नोटिस पर उनकी ओर से साइन नहीं किया है। जिस कॉमर्शियल माइनिंग के मुद्दे पर हड़ताल होनी थी, वार्ता में उस पर चर्चा ही नहीं हुई। इसलिए तय किया है कि 16 अप्रैल को देशभर में इसके खिलाफ कॉमर्शियल माइनिंग विरोध दिवस मनाएंगे। सीटू पदाधिकारियों ने बताया बिना ठोस नतीजे के हड़ताल टलना दुर्भाग्यजनक है। यूनियनों की हड़ताल की प्लानिंग तो फेल हो गई पर हड़ताल नहीं करने के मुद्दे पर साइन नहीं करने वाले दो यूनियनों में नाराजगी है। सीटू ने 16 अप्रैल को ही प्रदर्शन का ऐलान किया है। सीटू के स्थानीय नेताओं ने बताया ऐसी परिस्थितियों में हड़ताल संभव नहीं है इसलिए 16 को कॉमर्शियल माइनिंग के विरोध में हड़ताल की जगह सभा करेंगे। काला फीता लगा विरोध जताएंगे। एटक विरोध में शामिल नहीं है पर सीटू के विरोध का समर्थन करेगा।

कोयला मंत्रालय के सचिव से हुई वार्ता के बाद यूनियनाें ने हड़ताल वापस लिया, बीएमएस व एचएमएस के रुख से झटका

पहले से आंदोलन पर था संदेह ट्रेड यूनियन भी एकजुट नहीं

श्रमिकों के बीच यहीं चर्चा है कि वास्तव में किसी यूनियन में एकजुटता नहीं है। अापसी फूट से ही हड़ताल पर संदेह था, हुआ भी ऐसा ही। एक यूनियन पदाधिकारी ने बताया आंदाेलन को लेकर पहले ट्रेड यूनियनों के साथी साथ थे, हड़ताल के नोटिस में साइन भी किया था। अब ऐन आंदोलन के पहले हड़ताल वापस करने वाले नोटिस पर भी साइन कर दिया।

हमने पहले भी साइन नहीं किया था, जारी रहेगा विरोध- मनोहर: सीटू नेता वीएम मनोहर ने बताया कि कोल मिनिस्ट्री के सेक्रेटरी से हुई चर्चा के बाद दो हड़ताल नहीं करने के समझौते पर यूनियनों ने हस्ताक्षर कर दिया। जबकि एटक, सीटू ने ऐसा नहीं किया। सीटू ने 2015 में इस तरह की परिस्थिति बनने के बाद साइन नहीं किया था और दो िदन तक श्रमिक हितों के लिए लड़ते हुए हड़ताल किया था। वर्तमान में कॉमर्शियल माइनिंग के मुददें पर हमारा विरोध जारी रहेगा। वर्तमान में इस मुददों के लेकर चल रहे विरोध के माहौल के बीच अचानक हड़ताल टलना दुर्भाग्यजनक बात है।

इन बातों पर सहमति बनने के बाद आंदोलन स्थगित

सरकार कॉमर्शियल कोल माइनिंग की अनुमति कोल शार्टेज आंकलन के अनुसार ही देगी। इससे पीएसयू के हित प्रभावित नहीं होंगे। कॉमर्शियल माइनिंग के तहत कामगारों के वेतन भत्ते तय करने एक तंत्र काम करेगी। सरकार कर्मियों के वेलफेयर के लिए प्रति टन कोयले पर सेस लगाएगी। उपरोक्त पहलुओं पर चर्चा के लिए कमेटी बनेगी।

हवा में नहीं सच्चाई के आधार पर करें बात: बीएमएस

बीएमएस से संबद्ध अभा खदान मजदूर संघ के महामंत्री की ओर से जारी पत्र में कहा है कि वार्ता में शामिल कुछ यूनियनों ने समझौते पर साइन नहीं किया है, यह उनकी मजबूरी हो सकती है अन्यथा सारा ड्राफ्ट उनकी सहमति से बना है। जो अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं उनको हवा में बात करने की बजाय धरातल की सच्चाई के आधार पर बात करनी चाहिए।

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