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अस्पताल की 47 नियमित नर्सें हड़ताल पर 13 के भरोसे हो रहा 166 मरीजों का इलाज

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता|बैकुण्ठपुर

छह सूत्रीय मांगों को लेकर जिला अस्पताल की नर्सें हड़ताल पर रहीं। इसका असर अस्पताल की व्यवस्थाओं पर पूरी तरह से नजर आया। जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों की न तो ठीक से देखभाल हुई और न ही उन्हें सही इलाज मिल सका।

जिला अस्पताल जहां 47 नियमित नर्सों के साथ ही 13 परिवीक्षाधीन नर्से अस्पताल में भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य की देखभाल करती थी वहीं अब 47 नियमित नर्साे के हडताल में चले जाने से जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवा बुरी तरह चरमरा गई है। महज 13 नर्सो के भरोसे इस समय पूरे जिले अस्पताल की स्वास्थ्य सेवा है। ये परिवीक्षाधीन अवधि की नर्सें जिला अस्पताल के वार्डों में अपनी सेवाएं दे रही हैं। परिचारिका संघ ने छह सूत्रीय मांगों को लेकर शुक्रवार से हड़ताल शुरू कर दी है। जिला अस्पताल में लगभग 47 नर्सें शामिल हैं। जिला अस्पताल में महिला वार्ड, पुरुष वार्ड, प्राईवेट वार्ड, सर्जिकल वार्ड, शिशु वार्ड, आईसीयू मिलाकर 6 वार्ड हैं। इन वार्डो में बीते शुक्रवार और शनिवार को 66 नए मरीज भर्ती हुए जबकि अन्य सभी वार्डो में 100 से अधिक मरीज भर्ती हैं। इस प्रकार कुल 166 मरीजों को परेशानी हो रही है।

47 नियमित नर्सों की जगह 13 परिवीक्षाधीन नर्सों के भरोसे जिला अस्पताल

जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों की नहीं हो रही देखरेख। नर्स के इंतजार में बाटल भी नहीं लग सकी।

ग्रेड-2 का दर्जा और सातवें वेतनमान की है मांग

परिचारिकाओं की हड़ताल से स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी से उतर गई है। इनकी हड़ताल की वजह से जिला अस्पताल की स्थिति नाजुक हो गई है। स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य संचालनालय ने पत्र जारी किया है कि स्टाफ नर्स जन सामान्य की स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ीं हैं। यदि इनकी हड़ताल की वजह से किसी मरीज की मृत्यु होती है तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। हड़ताल अवधि का अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा। इस समय को ब्रेक इन सर्विस माना जाएगा। संचालनालय ने हड़ताल पर जाने वाली परिचारिकाओं के बारे में प्रदेशभर के अस्पतालों से जानकारी मांगी है। प्रदेश समेत कोरिया जिले की परिचारिका संघ ने अनिश्चित कालीन हड़ताल शुरू कर दी है। नर्सिंग स्टाफ की छह सूत्रीय मांगें तीन साल से लंबित हैं। इसमें स्टॉफ नर्सों के कार्यों के अनुरूप ग्रेड 2 का दर्जा और सातवां वेतन मान 4600 ग्रेड पर देने की मांग शामिल है। जिला चिकित्सा अधिकारी का दावा है कि हड़ताल से कोई काम प्रभावित नहीं हो रहा है। वहीं परिचारिका संघ ने कहा है कि शासन हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दे रहा है, इसलिए आंदोलन का फैसला लिया गया है। शनिवार को जिला अस्पताल में मरीज और उनके अटेंडर भटकते हुए नजर आए। किसी को इंजेक्शन तो किसी को बाटल लगवाने में परेशानी हुई।

अस्पताल में भर्ती मरीजों की फजीहत

मौसम के बदले तेवर के चलते पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। वहीं ऐसे मौके पर नर्सों के हड़ताल पर चले जाने से अब मरीजों को अस्पताल में भारी अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि नर्सिंग स्टाफ पिछले तीन साल से कार्यों के अनुरूप ग्रेड 2 का दर्जा देने, सातवां वेतनमान, 4600 ग्रेड पे करने की मांग कर रहा है, लेकिन आज तक मांगें पूरी नहीं हुई हैं। जिसके विरोध में अब आंदोलन के तहत शुक्रवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया गया है।

एचओ बोले- जानकारी शासन को भेजी

डाॅ.एस.एस.पैकरा, जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि जिला अस्पताल से सभी स्टाफ नर्स हड़ताल पर चली गई हैं। कहीं न कहीं थोड़ी सी परेशानी मरीजों को हो रही है। लेकिन मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है एवं वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। इसकी जानकारी शासन को भेज दी गई है।

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