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स्कूलों की प्रयोगशाला में ब्लैक बोर्ड से लेकर वाटर सप्लाई व बिजली फिटिंग जरूरी, लैब में खामी मिली तो होगी कार्रवाई

3 वर्ष पहले
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विज्ञान के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए इस बार शिक्षा निदेशालय ने सख्ती बरती है। स्कूलों की प्रयोगशाला में ब्लैक बोर्ड से लेकर वाटर सप्लाई व बिजली की फिटिंग जरूरी है। अगर अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान लैब में खामियां मिली तो इन पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। स्कूलों में साइंस की गतिविधि नियमित करने के लिए ही मिडिल, हाई व सीनियर सेकेंडरी सभी स्कूलों में साइंस किट भिजवाई गई है।

इसके अलावा 5 कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में रसायन शास्त्र, भौतिक व बायोलॉजी के प्रयोग करने के उपकरण व मेटेरियल भी भिजवाएं हैं। ऐसे में स्कूलों में इनका प्रयोग करना भी जरूरी है। यह देखने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों की ओर से निरीक्षण भी किया जाएगा।

प्रयोगशाला में लगाया जाए वर्क शेड्यूल : स्कूलों की प्रयोगशालाओं में वर्क शेड्यूल भी लगाना जरूरी है। ताकि निरीक्षण के दौरान अधिकारी को पता लग जाए कि आज कौनसा प्रयोग कराया गया है। इसके अलावा कक्षा 6 से 8वीं तक में साइंस वर्क बुक में भी कार्य कराया जाए। वहीं कक्षा 9 से 12 में प्रैक्टिकल बुक लगाने के साथ ही उसकी नियमित जांच भी करें।

निर्देश

मिडिल, हाईस्कूल व सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में भिजवाई साइंस किट

149 हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में भेजी किट : सर्व शिक्षा अभियान की ओर से जिला के 56 हाई स्कूल व 93 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में साइंस किट भिजवाई गई है। इन स्कूलों में विज्ञान प्रसार किट भी भेजी गई है। इसमें विज्ञान का किस प्रकार बढ़ावा दिया जाए, यह सब सिखाया जाएगा। इसके अलावा अपर प्राइमरी स्कूलों में रेवाड़ी खंड में 87, बावल में 62, जाटूसाना में 47, खोल में 47 व नाहड़ में 44 स्कूलों में यह साइंस किट भेजी गई हैं।

इन स्कूलों में भेजे साइंस उपकरण

जिला विज्ञान विशेषज्ञ चंद्रप्रकाश ने बताया कि जिला के पांच राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में जिनमें बावल, कोसली, डहीना, जाटूसाना व रेवाड़ी में जीव विज्ञान, रसायन शास्त्र व भौतिक विज्ञान विषय के उपकरण व मेटेरियल भेजे गए हैं। इसके अलावा राजगढ़, गोठड़ा टप्पा डहीना व महेश्वरी में अलग से विज्ञान के उपकरण भिजवाए गए हैं।

प्रयोगशाला बने बेहतर, यह ही उद्देश्य : डीईओ

विज्ञान की प्रयोगशालाओं को स्कूलों में बेहतर बनाया जाए, इसे लेकर ही प्रयास हो रहे हैं। लैब में हर दिन वर्क हो, यह भी देखा जाएगा। इसके लिए स्कूलों की जांच भी की जाएगी। -सुरेश गौरया, कार्यकारी डीईओ, रेवाड़ी।

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