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अस्पतालों में डिलीवरी के मामले में 98.1% के साथ जिला बना नंबर-1

3 वर्ष पहले
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सुविधाओं के अभाव में घरों में ही बच्चों को जन्म देने की बात अब पुरानी होती दिख रही है। अस्पतालों में बच्चों के जन्म मामलों में रेवाड़ी- अंबाला के साथ संयुक्त रूप से 98.1 फीसदी के साथ पहले नंबर पर आ गया है। अर्थात जिले में 100 में 98 बच्चों का जन्म अस्पतालों मे हो रहा है। हालांकि अभी भी लोग इस मामले में सरकारी की बजाय निजी अस्पतालों पर ही ज्यादा भरोसा जता रहे हैं। वर्ष 2017-18 के दौरान जिले में कुल 16795 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें से 9777 बच्चों का जन्म निजी अस्पतालों में हुआ। सरकारी में 7018 डिलीवरी हुई। बता दें कि पंचकूला दूसरे व गुड़गांव तीसरे नंबर पर रहा। बता दें कि 67.1 फीसदी के साथ नूहं फिसड्डी रहा। अर्थात यहां पर अभी भी 100 में से 33 महिलाओं की डिलीवरी घरों में ही हो रही है।

ऑपरेशन से डिलीवरी की सुविधा केवल नागरिक अस्पताल में : जिले में 50 बेड वाला नागरिक अस्पताल शहर में व 25 बेड वाला कोसली में है। 5 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 13 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 3 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, एक सेक्टर-4 स्थित डिस्पेंसरी व 113 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं। सभी सीएचसी व पीएचसी में डिलीवरी की सुविधा है, लेकिन ऑपरेशन से बच्चे का जन्म नागरिक अस्पताल में ही हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऑपरेशन की सुविधा नहीं होने के धारूहेड़ा, बावल व कोसली के लोगों को निजी गर्भवती को निजी अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ता है। यहीं कारण है कि अभी सरकारी ओर से प्रोत्साहन राशि सहित अन्य सुविधाओं के उपलब्ध कराने के बावजूद लोग निजी अस्पतालों में जा रहे हैं।

एक साल में 16795 डिलीवरी में से 9777 निजी अस्पतालों में

100 में से 98 बच्चों का जन्म अस्पतालों में

मातृत्व व शिशु मृत्यु दर में भी आई कमी

सीएमओ डॉ. कृष्ण कुमार।

लिंगानुपात में 9वें स्थान पर रहा जिला : अप्रैल माह में प्रदेश के 21 जिलों में लिंगानुपात की गणना की गई। जिला 943 के साथ नौंवें स्थान पर रहा। 966 के साथ गुड़गांव पहले स्थान पर है। जबकि निचले पायदान पर 871 के फतेहाबाद रहा। इसी के साथ शिक्षा मंत्री का ग्रह जिले में भी लिंगानुपात नहीं सुधर पा रहा है। यहां पर एक हजार लड़कों के मुकाबले 889 लड़कियों का जन्म हुआ। अर्थात महेंद्रगढ़ 21 जिलों की सूची में 20वें नंबर पर रहा।

सीएचसी-पीएचसी में बढ़ेगी सुविधा : अस्पतालों में डिलीवरी होने के मामले में जिला पहले नंबर पर आना अच्छी खबर है। इससे मातृत्व व शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी। नागरिक अस्पताल में ऑपरेशन से डिलीवरी करने की सुविधा मौजूद है। सीएचसी व पीएचसी में में सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है। ताकि सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी की संख्या बढ़ाई जा सके।

-डॉ. कृष्ण कुमार, सिविल सर्जन, रेवाड़ी।

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