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किसान महापंचायत मेंे लिया फैसला- 7 दिन में भुगतान नहीं तो रोकेंगे नॉर्दर्न बाईपास का काम

3 वर्ष पहले
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नॉर्दर्न बाईपास में अधिग्रहित जमीन के मुआवजे का भुगतान सात दिन में नहीं किया तो किसान यहां शुरू किए गए काम को बंद करा देंगे। इस मामले में जनप्रतिनिधियों का रवैया भी सकारात्मक नहीं रहा, इसलिए आने वाले चुनावों में उन्हें गांवों में नहीं घुसने दिया जाएगा, यदि घुसने का प्रयास किया तो उन्हें जूतों की माला पहनाकर मुंह काला करके गांव से निकला जाएगा। चाहे यह जनप्रतिनिधि किसी भी पार्टी का हो। इसके साथ ही मतदान का भी बहिष्कार किया जाएगा।

बाईपास के लिए जमीन अधिग्रहित करने के बाद उचित मुआवजा नहीं देने से यहां के किसान परेशान हैं। पिछले एक साल से उन्होंने एक आरओबी व एक किलोमीटर सड़क का काम रुकवा रखा था। लेकिन कुछ दिनों पहले ही प्रशासन ने पुलिस बल की मदद से काम शुरू कराया है। किसानों का कहना है कि काम करो पर पहले उनकी मांग को स्वीकार करो। इसी को लेकर रविवार को करीब 15 गांवों के किसानों की महापंचायत चंद्रलोक नदी के पास बुलाई गई। बड़ी संख्या में एकत्रित हुए किसानों ने एक स्वर में कहा कि जिन किसानों की जमीन ली गई है, प्रशासन पहले उसका मुआवजा दे। इसके बाद ही काम करे। जबकि कलेक्टर रोहित गुप्ता ने मार्च में किसानों से कहा था कि वे काम करने, एक माह में उनकी समस्या का समाधान नहीं हो तो काम रुकवा दें। उन्हें ऐसी क्या जल्दी थी कि वे बिना किसानों की समस्याओं को हल किए काम शुरू करवा रहे हैं। किसानों ने कहा कि आज कुछ किसानों के साथ यह घटना हुई है, कल से दूसरे किसानों के साथ ही यह घटना हो सकती है। इसलिए सभी को एकजुट होकर काम करना है।

नॉर्दर्न बाईपास पर महापंचायत को संबोधित करते हुए किसान नेता।

15 से अधिक गांवों के किसान हुए शामिल : किसान महासभा में 15 से अधिक गांव के किसान शामिल हुए, इसमें पीपल्दा शेखान, रामखेड़ली, बृजेश पुरा, पांड्या खेडली, रामराजपुरा, मानसगांव, नाेटाणा, देवली, नयागांव, पीपल्दा की झोंपडियां, झालीपुरा, चंद्रसल, अर्जुनपुरा, गांवड़ी, गंगायचा आदि के किसान मौजूद थे। इनमें ब्रजराज मीणा, भवानीशंकर, धनराज, बद्रीलाल मीणा, हेमराज नागर, महावीर, दिनेश राठौर, मुकुट नागर, परमानंद, स्वरूपसिंह सहित अन्य किसानों ने अपने विचार रखे।

जनप्रतिनिधि भी बेवकूफ बना रहे : किसान वक्ताओं ने कहा कि प्रशासन ही नहीं जनप्रतिनिधि भी उन्हें बेवकूफ बना रहे हैं लेकिन अब वे उनके झांसे में आने वाले नहीं है। सांसद, विधायक कहते हैं वे कुछ नहीं कर सकते, प्रशासन कहता है काम तो होगा, फिर इतने समय से उन्हें क्यों बेवकूफ बनाते रहे। उन्होंने कहा कि अब अपनी लड़ाई स्वयं लड़नी है। इसके लिए किसानों को एकजुट रहना होगा। अपनी ताकत दिखानी होगी। चाहे कुछ भी हो जाए, सात दिन बाद काम बंद करवाया जाएगा। किसान नेता मुकुट नागर ने कहा कि वे भी राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं। लेकिन, पहले उनके लिए किसान हैं, वे किसानों के साथ तन-मन धन से है। जैसे ही उन्होंने सात दिन में आंदोलन शुरू करने, जनप्रतनिधियों को गांव में नहीं घुसने देने, घुसने पर उनका मुंह काला करके गांव से निकालने व जूते की माला पहनाने की बात कही सभी किसानों ने हाथ उठाकर उनका समर्थन किया।

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