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होटल व्यवसायी पर थे केस, फिर भी थानों से पॉजिटिव रिपोर्ट मंगवाकर हथियार लाइसेंस रिन्यू करवा दिया एसपी गोदारा ने

3 वर्ष पहले
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19 अप्रैल, 2015 को मंजूर आलम ने तत्कालीन एसपी को परिवाद देकर दिनेश की रिवॉल्वर का लाइसेंस निरस्त कर थाना बोरखेड़ा में जमा कराने की मांग की थी। इस परिवाद में उसने दिनेश पर विचाराधीन प्रकरणों का ब्यौरा भी दिया था।

एसपी ने इसकी जांच तत्कालीन सहायक पुलिस अधीक्षक (वृत्त-चतुर्थ) को सौंपी। उन्होंने 10 जून, 2015 को रिपोर्ट में लिखा कि दिनेश के खिलाफ प्रकरणों के आधार पर उसका आर्म्स लाइसेंस निरस्त की कार्रवाई करें।

भास्कर

बिग ब्रेकिग

सवाई सिंह गोदारा के कार्यकाल में अप्रैल-2015 का मामला

आशीष जैन | कोटा

शहर के एक होटल व्यवसायी के आर्म्स लाइसेंस नवीनीकरण के मामले में तत्कालीन एसपी सवाई सिंह गोदारा ने आईजी के आदेश भी दरकिनार कर दिए। एसपी इस मामले में थाने से तब तक रिपोर्ट मांगते रहे, जब तक कि पॉजिटिव नहीं आ गई। इसी पॉजिटिव रिपोर्ट के आधार पर बाद में एसपी ने कलेक्टर को अनुशंसा भेज दी और व्यवसायी दिनेश शर्मा उर्फ मोली का आर्म्स लाइसेंस रिन्यू हो गया। मामले की शिकायत पीएचक्यू तक हुई तो आईजी से रिपोर्ट मांगी गई। आईजी ने तत्कालीन एसपी द्वारा की गई कार्रवाई पर कई सवाल उठाते हुए अपनी रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी। अब बताया जा रहा है कि पुलिस मुख्यालय ने पूरा मामला जांच के लिए विजिलेंस को सौंप दिया।

भास्कर के पास आईजी की ओर से पीएचक्यू भेजी गई वह रिपोर्ट है, जो यह बताती है कि किस तरह एक मामले में थानों से लेकर वृत्त स्तर के अधिकारी अलग-अलग रिपोर्ट भेजते रहे। इस मामले में आकाशवाणी कॉलोनी निवासी मंजूर आलम ने शिकायत दी थी कि दिनेश शर्मा और उसके बीच एक विवाद चल रहा है। इसे देखते हुए दिनेश शर्मा का लाइसेंस रिन्यू नहीं किया जाए। उसने एसपी से लेकर आईजी और डीजी तक परिवाद दिए, लेकिन लाइसेंस रिन्यू हो गया।

समझिए पुलिस ने कैसे काम किया और अफसरों ने तथ्यों को अनदेखा किया

सबसे पहले दोनों रिपोर्ट निगेटिव आई

कार्रवाई की बजाय नए सिरे से शुरू कर दी जांच

पत्र का जवाब नहीं दिया

दोनों वृत्ताधिकारी से प्राप्त रिपोर्ट के परीक्षण के बाद आईजी कार्यालय ने 19 जनवरी, 2016 को एसपी को दिनेश के आर्म्स लाइसेंस निलंबन संबंधी अग्रिम कार्रवाई करने तथा त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट भेजने के संबंध में वृत्ताधिकारी चतुर्थ का स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए, लेकिन एसपी ने इस पत्र का न तो जवाब दिया और न ही कार्रवाई की।

जांच के बाद ही की अनुशंसा

दिनेश के हथियार लाइसेंस के नवीनीकरण की अनुशंसा सक्षम जांच के बाद ही की गई होगी। वैसे पुराना मैटर है, लेकिन मैं इतना कह सकता हूं कि यह सब एक प्रक्रिया के तहत होता है। संबंधित थाने से रिपोर्ट लेकर अनुशंसा की जाती है। - सवाई सिंह गोदारा, तत्कालीन एसपी

थानाधिकारी बोरखेड़ा ने 15 जून, 2015 को दोनों पक्षों में टकराव की आशंका जताते हुए लाइसेंस निलंबित करवाने, हथियार थाने में जमा करवाने की अनुशंसा की।

दोनों रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन एसपी ने 25 जून, 2015 को अपनी रिपोर्ट में बताया कि दिनेश के खिलाफ दर्ज प्रकरणों के आधार पर कार्रवाई के लिए अपराध शाखा को निर्देश दिए जा चुके हैं।

एसपी की रिपोर्ट के आधार पर आईजी कार्यालय ने 10 अगस्त, 2015 को निर्देश दिए कि लाइसेंस निरस्तीकरण के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा जाए। कार्रवाई नहीं हुई तो 14 सितंबर, 2015 को आईजी ने दोबारा पत्र लिखा। एसपी ने इसके बावजूद कार्रवाई नहीं की और दिनेश के परिवाद पर जांच वृत्ताधिकारी-चतुर्थ को सौंप दी।

थाने से 3 बार मांगी रिपोर्ट, पहली निगेटिव, तीसरी पॉजिटिव

एसपी ने वृत्ताधिकारी-द्वितीय के मार्फत थानाधिकारी नयापुरा से बार-बार रिपोर्ट मांगी। थानाधिकारी नयापुरा ने 15 जनवरी, 2016 को अपनी रिपोर्ट में दिनेश के खिलाफ 5 प्रकरण दर्ज होना तथा प्रकरण संख्या 486/2014 में एफआर पेंडिंग होना अंकित करते हुए लिखा कि लाइसेंस का नवीनीकरण उचित नहीं है। वृत्ताधिकारी-द्वितीय ने भी यही टिप्पणी लिखी।

एसपी द्वारा फिर से रिपोर्ट मांगने पर 24 फरवरी, 2016 को नयापुरा थानाधिकारी ने रिपोर्ट दी कि आवेदक बोरखेड़ा में रहते हैं, जिनकी रिपोर्ट वहीं से ही प्राप्त की जा सकती है। इसके बाद 25 फरवरी, 2016 को दोबारा रिपोर्ट मांगी गई, जिस पर नयापुरा थानाधिकारी ने दिनेश का चरित्र सही होना अंकित करते हुए लाइसेंस नवीनीकरण में कोई आपत्ति नहीं होने की बात लिख दी।

परिवादी बोला-न्याय नहीं हुआ

दिनेश मेरी जमीन पर कब्जा करना चाहता है और हथियार के दम पर धमकाता है। इसी वजह से मैंने हथियार लाइसेंस निरस्त करने की मांग की थी।- मंजूर आलम, परिवादी

मैंने हथियार आत्मरक्षा के लिए लिया है, आज तक किसी पर कोई हमला नहीं किया। मंजूर ने मेरी जमीन पर कब्जा कर रखा है और दबाव बनाने के लिए शिकायतें करता है। लाइसेंस नियमों के तहत ही रिन्यू किया गया है। - दिनेश शर्मा, होटल व्यवसायी

फिर 2 रिपोर्ट में बता दिए अलग-अलग तथ्य

वृत्ताधिकारी चतुर्थ ने 14 सितंबर, 2015 को अपनी रिपोर्ट में दिनेश को प्रतिष्ठित होटल व्यवसायी बताया तथा सुकेत व जवाहर नगर में गैस एजेंसी बताते हुए लिखा कि रकम लेकर आने-जाने को देखते हुए हथियार लाइसेंस औचित्यपूर्ण है।

वृत्ताधिकारी चतुर्थ की रिपोर्ट में सहायक पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट से भिन्न तथ्य पेश किए थे। एसपी ने उनसे सवाल करना तक उचित नहीं समझा और नई रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर से आर्म्स लाइसेंस निरस्त नहीं करने की अनुशंसा कर दी। इसके बाद 17 नवंबर, 2015 को फिर से मंजूर आलम ने आईजी से शिकायत की।

आईजी ने पूरा प्रकरण वृत्ताधिकारी (ग्रामीण) को सौंप दिया। वृत्ताधिकारी ग्रामीण ने रिपोर्ट दी कि दिनेश के नाम से सुकेत या जवाहर नगर में गैस एजेंसी नहीं है। उसके खिलाफ 2 मामलों में चालान पेश हो चुका है। इसके बाद भी मारपीट के 3 प्रकरण दर्ज हैं, जिनमें एफआर दी गई है। 1 प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है।

रिपोर्ट में तथ्य अलग थे

मैंने अपनी रिपोर्ट पीएचक्यू भिजवा दी थी। अब पीएचक्यू ने क्या किया, यह वहीं से पता चलेगा। मेरे आदेश मानने या नहीं मानने का सवाल नहीं है, इसमें मुख्य मसला यह था कि रिपोर्ट में तथ्य अलग-अलग आ रहे थे।

- विशाल बंसल, आईजी, कोटा रेंज

भास्कर एक्सपर्ट

केस होने पर नहीं हो सकता नवीनीकरण

भास्कर ने आर्म्स लाइसेंस अनुभाग के रिटायर्ड वरिष्ठ सहायक सुरेश चंद शर्मा से बात की। शर्मा ने बताया कि हर 3 साल में आर्म्स लाइसेंस का नवीनीकरण अनिवार्य होता है। लाइसेंस नवीनीकरण से पहले पुलिस रिपोर्ट ली जाती है। यदि प्रकरण लंबित होने की बात सामने आती है तो फिर जिला मजिस्ट्रेट लाइसेंस रिन्यू नहीं करते। यह उनके ऊपर निर्भर करता है कि वे लाइसेंस को निलंबित करें या निरस्त कर दें। मुकदमे लंबित हो तो लाइसेंस रिन्यू नहीं किया जाए, इसमें एमएलए-एमपी या सेना कार्मिकों को छूट दी गई है।

आईजी ने लिखा-मेरे निर्देश नहीं माने

मामला जब डीजीपी तक पहुंचा तो आईजी से रिपोर्ट मांगी गई। आईजी ने पीएचक्यू को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा कि पूरी स्थिति से ऐसा लगता है कि जब तक सकारात्मक रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई, तब तक बार-बार एसपी द्वारा रिपोर्ट मांगी गई। आईजी ने यह भी कहा कि दिनेश शर्मा व इसके सहयोगी रणजीत कछावा के खिलाफ कई मामले नयापुरा थाने में दर्ज हैं। रणजीत का आर्म्स लाइसेंस निरस्त किया जा चुका है। उसके साथ दिनेश शर्मा भी आरोपी रहा है। निर्देश के बावजूद उसका लाइसेंस निरस्त नहीं कराया गया।

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