‘पूर्व जन्म के कर्मों से बनते हैं रिश्तेदार’
कोटा| जयश्री विहार में मंगलवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए महासती मंगल ज्योति ने कहा कि पूर्व जन्मों के कर्मों से ही हमें इस जन्म में माता-पिता, भाई-बहन, पति-प|ी, मित्र-शत्रु, सगे-संबंधी इत्यादि संसार के जितने भी रिश्ते नाते हैं, सब मिलते हैं। क्योंकि, इन सबको हमें या तो कुछ देना होता है या इनसे कुछ लेना होता है। वैसे ही संतान के रूप में हमारा कोई पूर्वजन्म का संबंधी ही आकर जन्म लेता है।