देश में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में एक लाख लोग होते हैं ब्रेन डेड
कार्यशाला में बोलते डॉक्टर।
सरकार के पास पेंडिंग है एनटीओआरसी की फाइल
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. गिरीश वर्मा ने कोटा में ऑर्गन ट्रांसप्लांट के स्तर पर हुए कार्य की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोटा में ब्रेन डेड कमेटी बनी हुई है। नॉन ट्रांसप्लांट रिट्राइवल सेंटर (एनटीओआरसी) की फाइल सरकार के स्तर पर पेंडिंग है। अंतिम बार जब हमने फॉलोअप किया था तो यह फाइल एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल के पास थी। उनके यहां से एक टीम आकर हमारे यहां का निरीक्षण करेगी और व्यवस्थाओं से संतुष्ट होने के बाद एनटीओआरसी की मंजूरी देगी। इस सेंटर की मान्यता मिलने के बाद हम किसी ब्रेन डेड मरीज के ऑर्गन निकालकर उस सेंटर को दे सकते हैं, जहां ट्रांसप्लांट होता है। ऑर्गन ट्रांसप्लांट सेंटर विकसित करना लंबी प्रक्रिया है।
आईएमए हॉल में दिया व्याख्यान
आईएमए कोटा की ओर से शुक्रवार रात नयापुरा स्थित आईएमए हॉल में “हार्ट फेल्योर एंड हार्ट ट्रांसप्लांट एन ओवरव्यू’ विषय पर सीएमई हुई। अध्यक्ष डाॅ. एसएन सोनी ने बताया कि सीएमई में मुख्य अतिथि प्रिंसिपल डॉ. गिरीश वर्मा थे। विशिष्ट अतिथि नए अस्पताल के अधीक्षक डाॅ. देवेंद्र विजयवर्गीय थे। सीएमई में हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जन डाॅ. अक्षय शर्मा ने व्याख्यान दिया। इस सत्र की अध्यक्षता डाॅ. पुरुषोत्तम मित्तल व डाॅ. प्रमोद नागर ने की। जयपुर के डाॅ. सौरभ जायसवाल ने ‘रिसेंट ट्रेंड इन मैकेनिकल काॅर्डियोस्प्रिटी सपोर्ट’ विषय पर व्याख्यान दिया।
4-6 घंटे में किया जा सकता है हार्ट ट्रांसप्लांट
इटर्नल हॉस्पिटल के हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. अक्षय शर्मा ने कहा कि डोनर से लिए गए हार्ट को 4 से 6 घंटे में ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। इसे लेकर पेशेंट ही नहीं डॉक्टरों में भी जागरूकता की जरूरत है। कोटा ऐसी जगह है, जहां से एयर कनेक्टिविटी है। महज 30-40 मिनट में कोटा से हवाई मार्ग से हार्ट जयपुर पहुंचाया जा सकता है। अब जागरूकता के लिए राज्य के सभी बड़े शहरों में इस तरह की कार्यशालाएं कर रहे हैं। हम यह नहीं कहते कि हर व्यक्ति ट्रांसप्लांट कराने में सक्षम है, जाहिर सी बात है आर्थिक कारण भी आड़े आते हैं। लेकिन, हमारा फर्ज बनता है कि उन्हें यह विकल्प भी बताएं। सामान्य व्यक्ति भी जिंदगी के लिए 15-20 लाख रुपए खर्च करने से पीछे नहीं हटता।