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‘पवित्र विचारों से मिलती है सुख-शांति’

3 वर्ष पहले
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कोटा| आरकेपुरम दिगंबर जैन त्रिकाल चौबीसी मंदिर में चल रही धर्मसभा में शुक्रवार को श्रमण विभंजन सागर महाराज ने रामायण का दृष्टांत देते हुए कहा कि दया धर्म का मूल है। उन्होंने कहा सुख शांति मांगने से नहीं मिलती, सुख किसी भी वृक्ष या फैक्ट्री से प्राप्त नहीं होता है। वह तो अंतरात्मा के पवित्र विचारों से उत्पन्न होता है। धर्मसभा में बड़ी संख्या में जैन समाजबंधु रहे।

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