विवि वसूली से घबराए कर्मचारी पहुंचे कोर्ट, आदेश पर लाए स्टे
वर्धमान कोटा ओपन में अनियमित वेतन वृद्धि से 2 करोड़ 96 लाख रुपए की अधिक राशि लेने वाले 162 कर्मचारी इसकी वसूली से घबरा गए हैं। इसके लिए वे कोर्ट में गए हैं, जहां से उन्हें विश्वविद्यालय की ओर से 20 मार्च को जारी आदेश पर रोक लगाने का स्थगन मिला है। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इससे पहले ही सभी कर्मचारियों को पुराने वेतन के अनुसार फिक्सेशन करके उन्हें पूर्व की भांति ही अप्रैल का वेतन दिया है।
विवि में हुई गड़बड़ी के बाद राज्य सरकार ने विवि के 7वें वेतन आयोग के तहत वेतन देने के प्रस्ताव को रोक दिया है। तीन करोड़ की ग्रांट भी रोक दी गई थी, लेकिन विवि द्वारा वेतन कटौती के आदेश जारी करने के बाद उसमें से दो करोड़ की ग्रांट जारी कर दी गई है। विवि प्रशासन ने सचिवालय सहित अन्य विशेष विभागों के लिए की गई वेतनवृद्धि को वर्ष 2013 से अपने यहां लागू करके उन्हें बढ़ा हुआ वेतन देना शुरू कर दिया। पूर्व में दी गई ग्रांट का हिसाब मांग लिया। इसमें गड़बड़ी देखते हुए वित्त विभाग ने विवि की स्पेशल आॅडिट करवाई। इसमें काफी अनियमितताएं पाई गईं। इसमें पाया गया कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति का गलत लाभ दिया गया। वहीं, 162 कर्मचारियों को गलत तरीके से वेतन वृद्धि का लाभ दिया गया। इसमें स्टेनो सहित सभी वर्ग के कर्मचारी शामिल हैं। इनसे 2 करोड़ 96 लाख 47 हजार 234 रुपए की वसूली करने के लिए भी कहा गया। यह पत्र विवि पहुंचते ही विवि प्रशासन ने बढ़ाई गई वेतनवृद्धि को खत्म करके फिर से कर्मचारियों को पुराने वेतन पर मानते हुए आदेश जारी कर दिए।
वर्धमान खुला विवि में कर्मचारियों से 2.96 करोड़ की वसूली होनी है
30 कर्मचारी कोर्ट से लेकर आए स्टे ऑर्डर
वेतन वृद्धि कम करने व अधिक ली गई राशि को वसूल करने के आदेश के खिलाफ करीब 30 कर्मचारी हाईकोर्ट से स्थगन लेकर आ गए। इसकी प्रति रजिस्ट्रार मुरलीधर प्रतिहार को दी गई। उन्होंने बताया कि अब इसे राज्य सरकार को भेजकर विधिक राय ली जा रही है। राज्य सरकार के आदेशों में सभी कर्मचारियों की बढ़ी हुई वेतन वृद्धि खत्म कर दी गई है। उनसे वसूली की प्रक्रिया चल रही है। इस गड़बड़ी के कारण यहां के कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग के अनुसार वेतन का प्रस्ताव भी अभी तक स्वीकृत नहीं हुआ है।