मन की भावनाओं को खुद के उत्थान में लगाएं: शशांक सागर
कोटा | दिगंबर जैन मंदिर विज्ञान नगर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए आचार्य शशांक सागर महाराज ने कहा कि जब बच्चे का जन्म होता है तो वह भावनाओं से रहित होता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, व्यक्ति की भावनाएं एवं इच्छाएं बढ़ती जाती है। इसका एक मात्र कारण है कि हम दूसरों के सुख को देखकर उसी के अनुरूप अपेक्षा रखने से ही दुखी होते है।
अतः मन में बढ़ने वाली इन भावनाओं को दूसरों की ओर देखने के बजाय स्वयं के उत्थान में लगाकर अच्छी राह पर चलते हुए आचरण में लाएंगे तो निश्चित ही परमात्मा से मिलन की राह प्रारंभ हो जाएगी। मंदिर समिति के मंत्री पीके हरसोरा ने बताया कि धर्म सभा का प्रारंभ नत्थी लाल जैसवाल ने दीप प्रज्ज्वलन करके किया। मंगलाचरण अनिता सेठिया द्वारा किया गया।