साध्वी क्षुल्लिका विवर्धमति माता का देवलोकगमन
कोटा| आर्यिका विशुद्धमति माता की संघ क्षुल्लिका 105 विवर्धमति माता ने सोमवार सुबह 10:38 बजे रिद्धि सिद्धि नगर के जैन मंदिर में समाधिमरण करके अपने देह का विसर्जन किया। वे देवलोक गमन कर गईं। उनका समाधि स्थल मंदिर के पास बनाया गया।
सकल दिगंबर जैन समाज के महामंत्री विनोद जैन टोरड़ी ने बताया कि वे कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहीं थीं। दो दिन पहले से उन्होंने संकल्प ले लिया था। दो दिन से आहार किया बंद कर दी थीं। वहां णमोकार मंत्र व धार्मिक आयोजन चल रहे थे। मंगलवार सुबह 10.38 बजे उन्होंने देह त्याग दी। इस दौरान उनका पूरा संघ व विशुद्धमति माता भी उनके पास ही थीं। उसके बाद सभी जगहों पर सूचना दी गई। टोंक, जयपुर, सवाईमाधोपुर और मालपुरा, जहां-जहां भी चातुर्मास किया था, वहां से लोग बस भरकर आ गए। शाम 4 बजे बोली लगाई और चकडोल यात्रा को कंधा देने वाले, आगे कमंडल लेकर चलने वाले और अग्नि दान देने वाले शामिल थे। रिद्धि सिद्धि जैन मंदिर के अध्यक्ष टीकम पाटनी ने बताया कि माता की अंतिम क्रिया में आचार्य शशांक सागर महाराज विज्ञाननगर से विहार करके रिद्धि सिद्धि नगर पहुंचे। मंदिर के पास माता का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान पुण्यार्जक परिवार मोहनलाल , कैलाश, यतीश खेड़ावाले परिवार ने माता के पार्थिव शरीर को अग्नि दान देकर अंतिम क्रिया को सम्पन्न किया। जेके जैन ने बताया कि उनका वहां समाधि स्थल भी बनाया जाएगा। माता के दर्शन करने विधायक प्रहलाद गुंजल भी पहुंचे। उनके अलावा विमल चंद जैन, अशोक सांवला, गुरुसेवा संघ के राजेंद्र गोधा, पारस व ताराचंद जैन मौजूद थे। जेके जैन ने बताया कि विवर्ध माता 20 साल की उम्र में वैराग्य से जुड़ गई थीं। इनका पहले नाम रेशमा देवी था और यह यूपी के एटा जिले की रहने वाली थीं। इनके तीन बेटे और एक पुत्री है।