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रेस्क्यू कर पैंथर व भालू को जू में रखने पर सीजेडए ने की अापत्ति

3 वर्ष पहले
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रेस्क्यू कर कोटा चिड़ियाघर लाए गए पैंथर व भालू को जू में रखने पर सीजेडए ने वन्यजीव विभाग को आपत्ति भरा नोटिस दिया है। नोटिस 10 मई को सीजेडए के मेंबर सेक्रेट्री डॉ. डीएन सिंह ने चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन को भेजा है। हालांकि नोटिस वन्यजीव विभाग कोटा को मंगलवार तक नहीं मिला है।

नोटिस में सीजेडए ने आपत्ति जताई है कि विभाग ने पैंथर व भालू को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 38आई का उल्लंघन करते हुए बिना चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन की परमिशन के रेस्क्यू कर कोटा जू में रखा गया है। सीजेडए की दूसरी आपत्ति है कि विभाग ने जू वर्ष 2009 के नियम का उल्लंघन करते हुए उन्हें विजिटर के लिए डिस्प्ले भी किया, जो गलत है। सीजेडए ने विभाग के प्रति कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि वन्यजीव विभाग शेड्यूल फर्स्ट व सैकंड के वन्यजीवों को चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन की बिना परमिशन के रेस्क्यू करके जू में नहीं रख सकता है।

सीजेडए ने वन्यजीव विभाग के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जीवी रेड्डी व वन्यजीव विभाग के डीसीएफ सुनील चिद्री को सख्त निर्देश दिए हैं कि अगर, पैंथर व भालू स्वस्थ हैं तो उन्हें सुरक्षित जंगल में छोड़ा जाए और वे अभी अस्वस्थ हैं तो उन्हें तत्काल जयपुर स्थित नाहरगढ़ रेस्क्यू सेंटर में भेजा जाए। इन वन्यजीवों को रखने पर जताई आपत्ति

29 अप्रैल को बूंदी के जावटी खुर्द गांव में भालू आ गया था। वन्यजीव विभाग ने रेस्क्यू करके उसे कोटा जू में रखा है। इसकी उम्र 9 वर्ष है। 4 मई को बिजौलिया के धनवाड़ा गांव में पैंथर आ गया था। जिसे रेस्क्यू करके विभाग कोटा जू लाया था।

भालू की उम्र 4 वर्ष है। दोनों को ट्रीटमेंट के लिए कोटा जू में रख रखा है। दोनों को घायल हालत में कोटा लाया गया था। भालू के दाईं पंजे में घाव था। पैंथर के शरीर पर कई जगह घाव थे। डॉ. अखिलेश पांडेय ने बताया कि ट्रीटमेंट के बाद दोनों के घाव भर गए हैं। भालू का 9 व पैंथर का 13 मई को ट्रीटमेंट बंद कर दिया। लेकिन, जंगल में छोड़ने पर व्यवहारिक रूप से इनके वापस आवासीय क्षेत्र में आने की संभावना है। डीसीएफ को दोनों वन्यजीवों की रिपोर्ट वह बुधवार को समिट करेंगे।

विभाग को नहीं मिला नोटिस

सीजेडए का नोटिस विभाग को नहीं मिला है। सीजेडए से कोई नोटिस मिलेगा तो विभाग चीफ वाइल्ड वार्डन के निर्देश पर नियमानुसार कार्रवाई करेगा।- सुनील चिद्री, डीसीएफ, वन्यजीव विभाग कोटा

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