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2डी और 3डी में नजर आएगी हाड़ौती की धरोहर : लखावत

3 वर्ष पहले
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धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण की ओर से कोटा में भले ही पैनोरमा तैयार नहीं हो रहा है, लेकिन हाड़ौती की पुरा धरोहर, संस्कृति और वैभव के नजारे अब लोगों को 2-डी और 3-डी के साथ बारां में देखने को मिलेंगे। यह बात राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकारसिंह लखावत ने शनिवार को पत्रकारों को बताई।

कोटा यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ हैरिटेज वंशावली शोधपीठ एवं भारतीय संकलन समिति की ओर से आयोजित नेशनल सेमिनार में आए कार्यक्रम में भाग लेने आए थे। अध्यक्ष लखावत ने बताया कि बारां में गजनपुरा के पास हाड़ौती का पैनोरमा तैयार किया जा रहा है। यहां 20 बीघा में से करीब 16 हजार स्क्वायर एरिया फीट में बनवाया जा रहा है। यहां विजिट करने वालों को 2-डी और 3-डी से इनका डिस्प्ले किया जाएगा। यहां पर हाड़ौती के गौरवशाली इतिहास, महापुरुष, साहित्य, कला-संस्कृति, धरोहर, आजादी के योगदान एवं अन्य परंपराओं को डिस्प्ले किया जाएगा। बूंदी, बारां, झालावाड़ और कोटा को शामिल कर यहां एक पैनोरमा नजर आएगा। उन्होंने कोटा और बूंदी में पैनोरमा बनाने को लेकर कोई जवाब नहीं दिया।

केशवरायपाटन, झालरापाटन सहित प्रदेश के पांच मंदिरों के लिए 20 करोड़ का बजट : अध्यक्ष ओंकारसिंह लखावत ने बताया कि प्रदेश के केशवरायपाटन, झालरापाटन के सूर्य मंदिर भरतपुर के गंगा मंदिर, बिहारी और लक्ष्मण मंदिर के अलावा बिहारी मंदिर के रिनोवेशन के लिए आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट को जिम्मेदारी सौंपी है। यहां 20 करोड़ रुपए से कार्य होंगे। उन्‍होंने बताया कि हाड़ौती में झालावाड़ के पीपाजी धाम में तीन एकड़ में पैनोरमा बनेगा। कार्य तेजी चल रहा है। अलवर में हसन खां मेवाती का स्मारक का बनकर तैयार हो चुका है। इसका जल्द लोकार्पण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि डूंगरपुर में भील आदिवासी महिला कालीबाई, भीनमाल में गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त और महाकवि माघ सहित अन्य स्थानों पर स्मारक और पैनोरमा बनाए जा रहे हैं। 1857 में राजस्थान का योगदान पर पहली बार प्रदेश में आउवा में कार्य किया जा रहा है। उन्‍होंने बताया कि चित्तौड़ में डेढ़ करोड़ से गौरा-बादल स्मारक बनाया जा रहा है।

हमें देश के गौरवशाली इतिहास को समझना होगा : कोटा यूनिवर्सिटी के स्कूल आॅफ हैरिटेज एवं वंशावली शोधपीठ की ओर से भारत में लोक इतिहास परंपरा एवं ऐतिहासिक स्रोत वंशावली लेखन अध्ययन के विशेष संदर्भ में दो दिवसीय नेशनल सेमिनार का शुभारंभ हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने कहा कि हमें ईमानदार, राष्ट्रभक्त तथा कर्मठ नागरिक निर्माण के लिए स्टूडेंट्स को पाठ्य पुस्तकों में हरिशचंद्र, राणा सांगा, राणा प्रताप तथा शिवाजी के जीवन एवं चरित्र मूल्यों को पढ़ाना होगा। उन्होंने पांडुलिपियों को लेकर कहा कि दुनिया के देश हमारी पांडुलिपियां ले गए। उन्होंने कहा कि ऐसे में हमें देश के गौरवशाली इतिहास को समझना होगा। मुख्य वक्ता इलाहाबाद उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के अध्यक्ष ईश्वरशरण विश्वकर्मा ने कहा कि भारत में लोक परंपराओं एवं प्राचीन शैलचित्रों पर आधारित लोक इतिहास की मजबूत परंपरा रही है, जो विश्व के अन्य देशों में हमें दिखाई नहीं देती है। उन्होंने कहा कि सबसे पहला प्रयास है उपलब्ध स्रोतों जिनमें वंशावली एक महत्वपूर्ण तथा प्रमाणिक स्रोत है इस पर गहन शोध करना आवश्यक है। यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. पीके दशोरा ने कहा कि भारत की संस्कृति में पुरुषार्थ की धारणा विश्व की किसी अन्य संस्कृति में हमें दिखाई नहीं देती है।

बारां हाइवे के पास गजनपुरा में बनाया जा रहा है हाड़ौती का पैनोरमा, हाड़ौती की कला एवं संस्कृति एक कैंपस में आएगी नजर

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