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सरकार की लोन माफी का सच: 20 हजार किसानों को चुकाना पड़ा 100 करोड़ का कर्ज, 3 ने की आत्महत्या

3 वर्ष पहले
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लक्ष्मीचंद पर था 8 लाख रुपए का कर्ज

कोटा जिले के कजलिया गांव के रहने वाले किसान लक्ष्मीचंद सुमन पर 7 से 8 लाख रुपए का कर्ज था। लहसुन के दाम ठीक नहीं मिलने से परेशान होकर उसने 24 अप्रैल को आत्महत्या कर ली।

बारां जिले के गांव रहलाई का किसान रेवड़ीलाल 2 साल से केसीसी का 3 लाख का कर्ज नहीं चुका पा रहा था। इधर, लहसुन के कम दाम सुनने से उसे सदमा लगा और उसने 19 अप्रैल को जहर खाकर आत्महत्या कर ली।

बारां जिले के खैराली गांव के महावीर धाकड़ के साथ भी यही हुआ। उसने फसल के लिए बैंक से 6 लाख रुपए का लोन ले रखा था। फसल खराब होने और भाव नहीं मिलने से परेशान होकर 8 मई को फांसी लगा ली।

एक्सपर्ट

की राय

किसान नेता दशरथ कुमार ने कहा कि सरकार 23 कॉलम में सूचना मांग रही है। अभी तक कर्ज माफी सिर्फ कागजों में ही है। किसान नेता चौथमल नागर ने कहा कि यूपी में भी सरकार ने कर्जमाफी की घोषणा की थी, जहां किसानों के 5 और 10 रुपए तक के लोन माफ हुए थे। कहीं प्रदेश में भी वही हाल नहीं हो। द कोटा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के पूर्व चेयरमैन सुरेंद्र सिंह सांगोद ने कहा कि सरकार की यह बजट घोषणा अभी तक कोरी निकली।

कर्जमाफी की तैयारी चल रही है : गिल

रेवड़ीलाल ने खाया जहर, 3 लाख कर्ज था

उप्र जैसा हाल होने की आशंका

सरकार के निर्देश पर कर्जमाफी की तैयारी चल रही है। समितियों से किसानों की डिटेल ली जा रही है। कई के आधार व भामाशाह कार्ड नहीं है। कई खातेदार किसानों की मौत हो चुकी। ऐसे में सूचियों की स्क्रूटनी कर रहे है। सूचियां फाइनल होने पर सरकार को भेजी जाएंगी। यह प्रक्रिया पूरे प्रदेश में चली रही है। कर्जमाफी सरकार करेगी।-बलविंदर सिंह गिल, एमडी, द कोटा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक

भास्कर

नॉलेज

राज्य सरकार अभी द कोटा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक से कर्जदार किसानों की डिटेल मांग रही है। इसमें किसानों का आधार कार्ड, भामाशाह कार्ड, कृषि जोत आदि की जानकारी मांगी जा रही है। ये काम भी बजट घोषणा के डेढ़ महीने बाद अप्रैल में शुरू हुआ। अभी तक 43 हजार किसानों की लिस्ट बना ली गई है। बचे 14 हजार किसानों की लिस्ट बनाने में कम से कम एक महीने लगेगा क्योंकि इसमें मृतक और लापता किसानों के नाम भी शामिल हैं।

महावीर ने लोन नहीं चुका तो लगाई फांसी

1 माह में तैयार होगी यह लिस्ट

भास्कर लाइव

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लोन चुकाने के लिए घाटे में बेचनी पड़ी फसल

सांगोद के बाछीहेड़ा गांव निवासी चौथमल नागर ने सहकारी समिति से अप्रैल 2017 में 1.38 लाख का कर्ज लिया था। कर्जमाफी की घोषणा हुई तो उन्होंने सोचा कि कर्ज के बोझ से कुछ राहत मिलेगी। लेकिन, राहत के इंतजार में लोन की 364 दिन की मियाद पूरी होने को आ गई। लोन चुकाने के लिए चौथमल को चने की फसल बेचनी पड़ी। मंडी पहुंचे तो वाजिब दाम नहीं मिले। उस समय चने का समर्थन मूल्य 4400 था, लेकिन सरकारी खरीद केंद्र पर टोकन नहीं मिले। उनको मजबूरी में 3300 रुपए क्विंटल में फसल बेचनी पड़ी।

बच्चों की फीस के लिए ब्याज पर लेने पड़े रुपए

कालातालाब के किसान भाइयों मोहम्मद हुसैन देशवाली व हसन अली ने 2 लाख का लोन लिया था। कर्ज माफी के इंतजार में लोन चुकाने की मियाद पूरी हो गई। दोनों के बच्चे जालंधर में पढ़ते हैं, उनकी फीस भेजने का समय आ गया। आढ़तिए से 2 प्रतिशत ब्याज पर उधार लेकर बच्चों को पैसे भेजे। इसके बाद धान-गेहूं बेचकर आढ़तिए और सहकारी समिति का लोन चुकाया। लोन चुकाने की समय सीमा समाप्त हो जाने के कारण 2 लाख पर 7 प्रतिशत की दर से ब्याज भी देना पड़ा।

कहानियों से समझें किसानों की परेशानी

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