धोखाधड़ी के दो आरोपियों को 3-3 साल की सजा
धोखाधड़ी के 31 साल पुराने मामले में कोर्ट ने दो आरोपियों मधु एजेंसी के मैनेजर शरद कुमार शर्मा और पार्टनर प्रकाश बाबू पारीक को तीन-तीन साल की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 40-40 हजार का जुर्माना भी किया है। जबकि एक अन्य आरोपी पार्टनर विमला पारीक को बरी कर दिया गया। कोर्ट ने इसी मामले में आरोपी गोविंदसिंह राजावत की मृत्यु होने पर उसके विरुद्ध कार्रवाई निरस्त कर दी। इस मामले में आरोपी मधु चावला फरार है।
फरियादी ब्रजराज पुरा निवासी मोहम्मद राशिद ने 1985 में एक परिवाद कोर्ट में पेश किया था। इसमें इन सभी को आरोपी बनाया था। इसमें आरोप लगाया था कि उसने कंफेक्शनरी फैक्ट्री लगाने के लिए राजस्थान वित्त निगम से 24 हजार 400 रुपए का ऋण स्वीकृत कराया था। वित्त निगम ने 5 सितंबर 1985 को फरियादी को 3 कोटेशन लाने के लिए कहा तो वह गोविंद सिंह से मिला। इस पर उसने उससे कहा कि मधु एजेंसी पर चले जाओ। वह एजेंसी पर चला गया। जहां प्रकाश बाबू मिला। जहां उसने उसे 3 कोटेशन दे दिए।
सबसे कम कोटेशन मिलने पर मधु एजेंसी को टेंडर मिल गया। कुछ मशीनों के लिए उसने पैसे जमा करा दिए। इस पर उसे 21 सौ रुपए की दो मशीनें दे दीं और बाकी नहीं दी। इस तरह उसे टालते रहे। मैनेजर राजावत ने कहा कि पूरी मशीनें लग गई हैं। लेकिन, मशीनें नहीं लगी और प्रकाश ने 18 हजार 145 रुपए नहीं लौटाए। गुमानपुरा पुलिस ने 1987 में मामला दर्ज कर इन सभी आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया था।