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महज 100 रुपए कमाई के लालच में अवैध रूप से वाहनों में भरी जा रही है घरेलू गैस

3 वर्ष पहले
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कोटा | घरेलू गैस सिलेंडर की कालाबाजारी रोकने के लिए भले ही सरकार ने सब्सिडी का बैरिकेड लगाया हो, लेकिन कोटा में घरेलू सिलेंडर से वाहनों में गैस भरने का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। मोटर मार्केट क्षेत्र में ऐसे कई दुकानदार हैं जो लोगों की जान जोखिम में डालकर घरेलू सिलेंडर से वाहनों में गैस भरने का अवैध काम कर रहे हैं। अधिकृत ऑटो एलपीजी महंगी जरूर पड़ती है, लेकिन इंसान की जान और वाहन के इंजन दोनों के लिए सुरक्षित है।

अवैध रूप से भरी गई एक टंकी गैस 150 रुपए सस्ती पड़ती है, लेकिन ये जान और इंजन दोनों के लिए घातक साबित होती है। भास्कर ने इस संबंध में पड़ताल की तो सामने आया कि मात्र 60 पैसे प्रति किलोमीटर बचाने के चक्कर में वाहन मालिक सिलेंडर से गैस भराते हैं। 100 से 150 रुपए प्रति वाहन कमाई के लालच में दुकानदार भी इस काम को अवैध रूप से करते हैं।

घरेलू गैस का कॉमर्शियल उपयोग हो रहा है तो सीधे कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन वाहनों में उपयोग किया जा रहा है तो उसके लिए आरटीओ के साथ मिलकर कार्रवाई करनी पड़ती है। शीघ्र कार्रवाई करेंगे। -अशोक मीणा, डीएसओ

कई इलाकों में चल रहा यह कारोबार, कार्रवाई नहीं कर रहे अधिकारी

मामूली फायदे के लिए उठा रहे जान का जोखिम

घर पर आकर भरने की सुविधा भी : शहर में तीन-चार लोग ऐसे भी हैं जो घर आकर घरेलू सिलेंडर से कार में एलपीजी भरने का काम कर रहे हैं। इन लोगों ने 8 हजार की एक मोटर खरीद रखी है जिससे सिलेंडर से वाहन की टंकी में गैस भरी जाती है। ये पूरे परिवार की सुरक्षा दांव पर लगाकर घर के पोर्च में ही घरेलू सिलेंडर से वाहन में गैस ट्रांसफर कर देते हैं। इसके बदले में वे दूरी के हिसाब से प्रति वाहन 50 से 100 रुपए चार्ज करते हैं। आंखें मूंदे बैठे हुए हैं रसद विभाग के अफसर : इस मामले में काफी समय से रसद विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। पहले रसद विभाग ने ऐसी दुकानों व वर्कशॉप पर लगातार छापे मारे थे। उसके बाद कई दुकानदारों ने स्थायी रूप से ये कार्य बंद कर दिया था, लेकिन काफी समय से कार्रवाई नहीं होने से वापस कुछ लोगों ये कारोबार शुरू कर दिया। विभाग के पास ऐसी शिकायतें जा रही हैं, फिर भी उसके अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे।

घरेलू एलपीजी से वाहन के इंजन को होता है नुकसान

घरेलू सिलेंडर में जो एलपीजी आती है वो नॉन फिल्टर होती है, जबकि फिलिंग स्टेशन पर एलपीजी फिल्टर आती है। नॉन फिल्टर एलपीजी से वाहन के इंजन को नुकसान होता है। उसकी क्षमता कम हो जाती है। पिकअप में भी अंतर आता है। ऑटो एलपीजी 39.23 रुपए प्रति लीटर आती है। एक वाहन में 25.5 लीटर गैस भरी जाती है। जबकि, घरेलू सिलेंडर में 14.6 किलो गैस होती है, जो 25.5 लीटर के बराबर होती है, क्योंकि एक लीटर गैस ग्राम में 575 ग्राम रह जाती है।

भास्कर नॉलेज

ब्लैक करने से चल रहा कारोबार : सरकार ने घरेलू कनेक्शन पर एक वर्ष के 12 गैस सिलेंडर फिक्स कर दिए। शहर में करीब 10 हजार परिवार ऐसे हैं जिनके एक साल में 12 सिलेंडर की खपत नहीं होती। कई लोग एजेंसियों से सिलेंडर पूरे ले लेते हैं और बाद में बेच देते हैं। एक सिलेंडर उन्हें 660.50 रुपए में मिलता है। इस पर 156 रुपए सब्सिडी उनके खाते में आ जाती है। सिलेंडर को 750 रुपए तक में ब्लैक कर देते हैं।

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