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नहीं दिखा चांद, कल से शुरू होंगे रोजे

3 वर्ष पहले
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इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार शाबान महीने की बुधवार 29 तारीख को शहर में चांद नहीं दिखा है। इसके चलते अब रोजे शुक्रवार सुबह से शुरू होंगे। तराबीह की नमाज आज शाम से शुरू होगी। नायाब काजी जुबेर अहमद ने बताया कि बुधवार रात को चांद नहीं दिखा है। इसलिए रोजे गुरुवार की जगह शुक्रवार से शुरू होंगे। सेहरी सुबह 4.05 बजे होगी और इफ्तार शाम 7.10 बजे होगा।

शहर की मस्जिदों में इसके लिए तैयारियां पूरी हो गई हैं। रमजान का महीना बुराई छोड़ना और भलाई करना सीखता है। उन्हें अपने खुदा और उसके बंदों के हक में भले काम करने होते हैं।

पांच वक्त की नमाज पढ़नी चाहिए और दूसरों की मदद करनी चाहिए। रमजान सब्र करना भी सिखाता है। इस बार रोजे 15 घंटे और उससे अधिक के भी होंगे। शहर काजी अनवार अहमद ने बुधवार रात को चांद देखा। चांद नहीं दिखने पर शहरभर में सूचना करवा दी गई है। हाड़ौती में कहीं भी चांद नहीं दिख है।

डायबिटीज वाले रखें ध्यान

मेडिकल कॉलेज प्राचार्य एवं सीनियर फिजीशियन डॉ. गिरीश वर्मा ने बताया कि डायबिटीज और रोजों को लेकर कई बार रिसर्च हुआ है। इसमें चार प्रकार के लोगों का विभाजन किया। इसमें बहुत ज्यादा शुगर होने, बार-बार बदलाव होने, कम और बिलकुल नहीं होने पर। इसमें ज्यादा शुगर और बार-बार बदलाव होने पर लोगों को रोजे नहीं रखने चाहिए। इसके अलावा छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाओं को भी रोजे नहीं रखने चाहिए। जो डायबिटिक रोगी रोजे रख रहा है, वह दिन में ग्लुकोज मीटर से जांच करवा ले। वहीं, जो सामान्य व्यक्ति भी रोजा रख रहा है। उसे कम से कम धूप में जाना चाहिए। सेहरी और इफ्तार के समय ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ, जूस, पानी, नारियल पानी, फलों के रस पीना चाहिए अौर भारी भोजन से बचना चाहिए, इससे पानी की कम आवश्यकता हो।

एक दिन की नहीं 30 दिन की ट्रेनिंग, जिससे 11 महीने होता है बदलाव: शहरकाजी : शहरकाजी अनवार अहमद ने कहा कि रमजान का चांद नहीं दिखने पर अब शुक्रवार से रोजे होंगे और तराबीह की नमाज आज से शुरू हो जाएंगे। रमजान एक महीने का ट्रेनिंग पीरियड है। यह इस्लाम का चौथा फरीज़ा है। रोजे का मतलब परहेजदारी करना है। जो एक दिन की नहीं बल्कि एक महीने की होती है। एक महीने तक व्यक्ति ट्रेनिंग में रहता है। उसे हाथ, पैर, जुबान, आंख का रोजा रखना होता है। इसमें हाथ से किसी पर जुल्म नहीं करे, पैरों से बुराई की तरफ नहीं जाए, जुबान से किसी को बुरा नहीं बाेले और आंख से कोई बुराई नहीं देखे। एक महीने की ट्रेनिंग से व्यक्ति के यह सब आदत में आ जाता है। वे बुराई को छोड़कर भलाई में लग जाते हैं। एक महीने की आदत हो जाती है, जो अगले 11 महीने तक रहती है। इससे आदमी खुद की जिंदगी तो बेहतर बनाता है, बल्कि उसे देखकर दूसरे भी अपनी जिंदगी बेहतर करते हैं। वह दूसरों के लिए आदर्श बनता है।

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