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वकीलों ने घेराव किया तो मंत्री प्रभुलाल सैनी बोले-क्या अनपढ़ों की तरह नारे लगा रहे हो?

3 वर्ष पहले
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70 साल पहले कोटा में थी हाईकोर्ट बेंच

पहले हक जयपुर को दिया, अब उदयपुर की तैयारी

हाईकोर्ट बेंच पर सबसे पहला हक कोटावासियों का है। लेकिन, हर बार सरकार के छलावे ने कोटा का हक दूसरे जिलों को दिया। कोटा का दावा इसलिए मजबूत है क्योंकि 70 साल पहले स्टेट टाइम में राजस्थान हाईकोर्ट बेंच के फैसले कोटा में होते थे, लेकिन 1950 में राजस्थान की राजधानी जयपुर क्या बनी, सरकार ने कोटा का हक छीनकर जयपुर को दे दिया। अब उदयपुर में हाईकोर्ट बेंच खोलने की तैयारी में है।

2003: हक मांगा, हड़ताल की शुरुआत

हाईकोर्ट बेंच का हक मांगने की कोटावासियों ने पुरजोर तरीके से शुरूआत की। पूरे साल आंदोलन हुए। तब से अाज तक वकील माह के अंतिम दिन हड़ताल करते आ रहे हैं।

कलेक्ट्रेट कार्यालय पर धरने के दौरान वकीलों ने हाईपावर कमेटी के आदेशों की प्रतियां जलाकर प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। वकीलों ने रजिस्ट्रार कार्यालय को बंद कराने की कोशिश में बाहर रखी बेंच को पलट दिया और कार्यालय में घुस गए। वकीलों द्वारा कलेक्ट्रेट कार्यालय पर मंगलवार को सुबह 10 से 12 बजे तक धरना दिया जाएगा। वकीलों ने हड़ताल रखकर न्यायालयों का बहिष्कार रखा। अभिभाषक परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष अतीश सक्सेना और महासचिव जितेंद्र पाठक के नेतृत्व में वकीलों ने अदालत परिसर से रैली निकाली। यह रैली कलेक्ट्रेट कार्यालय पर पहुंची। वहीं विधायक प्रहलाद गुंजल ने भी वकीलों के आंदोलन को समर्थन दिया है।

2009: पूर्व कानून मंत्री ने किया था वादा

करीब 4 माह तक शहर में हड़ताल चली। पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने तत्कालीन सांसद इज्यराज की मौजूदगी में वकीलों से वादा किया कि हाईकोर्ट बेंच कोटा में खुलेगी।

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