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एनआरएचएम कार्मिकों की हड़ताल से कई जांचंे अटकी

3 वर्ष पहले
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स्टेशन क्षेत्र के कैलाशपुरी के रहने वाले ललित सोमवार को भीमगंजमंडी सीएचसी में डॉक्टर को दिखाने गए। पीलिया की आशंका होने पर डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना के तहत पर्चा भरा और अस्पताल की लैब पर जाकर जरूरी जांचें कराने की सलाह दी। वहां जाकर पर्चा दिखाया तो स्टाफ ने बताया कि इन जांचों के लिए रीएजेंट खत्म हो चुके हैं, इसलिए फिलहाल ये जांचें नहीं हो पाएंगी। रीएजेंट खत्म क्यों हुए? इसके जवाब में पता चला कि एनआरएचएम के तहत यहां कार्यरत अकाउंटेंट 80 दिन से ज्यादा समय से हड़ताल पर हैं और चेक बुक उन्हीं के पास है। उनके कक्ष का ताला लगा है, ऐसे में रीएजेंट की खरीद नहीं हो पा रही। थक हारकर ललित प्राइवेट लैब गए और 250 रुपए देकर जांच कराकर आए। यह महज एक उदाहरण है, एनआरएचएम कार्मिकों की हड़ताल से दिनोंदिन हालात बिगड़ते जा रहे हैं। खास तौर से ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में सभी तरह के काम प्रभावित हो रहे हैं। कोटा जिले में एनआरएचएम के 48 कार्मिक 25 फरवरी से हड़ताल पर है। हाल ही में सरकार ने इन्हें ज्वाइन करने का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन इसके बावजूद ये कार्यस्थलों पर नहीं लौटे। ड्यूटी पर नहीं लौटने पर भी सरकारी स्तर पर इनके काम को करने के लिए पुख्ता वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा रही। कोटा में कलेक्ट्रेट के बाहर हड़ताली कर्मचारियों का नियमित धरना चल रहा है।

इन कार्मिकों के लिए सरकार के स्तर 14 मई तक का अल्टीमेटम दिया गया था। इसके बाद जिन्होंने ज्वाइन नहीं किया, उन्हें हटाया जाएगा। यदि कहीं चाबियां ले गए तो संबंधित प्रभारियों को ताले तुड़वाने चाहिए। आशाओं के भुगतान की समस्या भी धीरे-धीरे सॉल्व हो रही है। रोटेशन आधार पर कंप्यूटर ऑपरेटर भिजवाकर उनका काम कराया जा रहा है। -डॉ. महेंद्र त्रिपाठी, कार्यवाहक सीएमएचओ

48 कार्मिक 80 से ज्यादा दिन से चल रहे हड़ताल पर, वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर पा रहा चिकित्सा विभाग

कलेक्ट्रेट पर धरना देते हुए।

‘14 मई तक का अल्टीमेटम दिया था, जिसने ज्वॉइन नहीं किया उसे हटाएंगे’

हैल्थ रिपोर्टर|कोटा

स्टेशन क्षेत्र के कैलाशपुरी के रहने वाले ललित सोमवार को भीमगंजमंडी सीएचसी में डॉक्टर को दिखाने गए। पीलिया की आशंका होने पर डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना के तहत पर्चा भरा और अस्पताल की लैब पर जाकर जरूरी जांचें कराने की सलाह दी। वहां जाकर पर्चा दिखाया तो स्टाफ ने बताया कि इन जांचों के लिए रीएजेंट खत्म हो चुके हैं, इसलिए फिलहाल ये जांचें नहीं हो पाएंगी। रीएजेंट खत्म क्यों हुए? इसके जवाब में पता चला कि एनआरएचएम के तहत यहां कार्यरत अकाउंटेंट 80 दिन से ज्यादा समय से हड़ताल पर हैं और चेक बुक उन्हीं के पास है। उनके कक्ष का ताला लगा है, ऐसे में रीएजेंट की खरीद नहीं हो पा रही। थक हारकर ललित प्राइवेट लैब गए और 250 रुपए देकर जांच कराकर आए। यह महज एक उदाहरण है, एनआरएचएम कार्मिकों की हड़ताल से दिनोंदिन हालात बिगड़ते जा रहे हैं। खास तौर से ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में सभी तरह के काम प्रभावित हो रहे हैं। कोटा जिले में एनआरएचएम के 48 कार्मिक 25 फरवरी से हड़ताल पर है। हाल ही में सरकार ने इन्हें ज्वाइन करने का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन इसके बावजूद ये कार्यस्थलों पर नहीं लौटे। ड्यूटी पर नहीं लौटने पर भी सरकारी स्तर पर इनके काम को करने के लिए पुख्ता वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा रही। कोटा में कलेक्ट्रेट के बाहर हड़ताली कर्मचारियों का नियमित धरना चल रहा है।

इन कार्मिकों के लिए सरकार के स्तर 14 मई तक का अल्टीमेटम दिया गया था। इसके बाद जिन्होंने ज्वाइन नहीं किया, उन्हें हटाया जाएगा। यदि कहीं चाबियां ले गए तो संबंधित प्रभारियों को ताले तुड़वाने चाहिए। आशाओं के भुगतान की समस्या भी धीरे-धीरे सॉल्व हो रही है। रोटेशन आधार पर कंप्यूटर ऑपरेटर भिजवाकर उनका काम कराया जा रहा है। -डॉ. महेंद्र त्रिपाठी, कार्यवाहक सीएमएचओ

ये हैं प्रमुख मांगें

हड़ताली कर्मचारियों में शामिल अर्पित विजय ने बताया कि हमारी 3 प्रमुख मांगें हैं। पहली नियमितीकरण, दूसरा वेतन पुनर्निर्धारण और तीसरा हमारे कार्मिकों के खिलाफ प्रदेश में दर्ज किए गए झूठे मुकदमे वापस हो। उल्टा रोज-रोज नए तरह के आदेश जारी करके हमें धमकाया जा रहा है।

आशा सुपरवाइजर : करीब 17 आशा सुपरवाइजर हड़ताल पर चल रहे हैं।

अकाउंटेंट : ब्लॉक, सीएचसी व पीएचसी पर कार्यरत 20 से ज्यादा अकाउंटेंट हड़ताल में शामिल हैं।

कंप्यूटर ऑपरेटर : विभाग में संचालित सभी तरह के सॉफ्टवेयर इन्हीं कंप्यूटर ऑपरेटरों के भरोसे अपडेट होते हैं।

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