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रमजान: 44 डिग्री के तापमान में रोजेदारों ने 15 घंटे से अिधक रखा रोजा

3 वर्ष पहले
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शाम 7.06 बजे

सहरी

20 मई (रविवार)

सुबह 4.08 बजे

सिटी रिपोर्टर | कोटा

खुद को खुदा की राह में समर्पित कर देने का प्रतीक महीना है माह ए रमजान। जो शुक्रवार को जुमे नमाज के साथ शुरू हो गया है। मुस्लिम समुदाय ने पवित्र माह रमजान में सुबह जल्दी उठकर सहरी की। रोजेदारों ने रोजा रखा और शाम को रोजा इफ्तार के बाद नमाज अदा की। गर्मी में रोजेदारों ने 15 घंटे भूखे-प्यासे रहते हुए अपना फर्ज अदा किया। पांच वक्त की नमाज पढ़ते हुए इबादत की है। यह दौर शहर की विज्ञाननगर, छावनी, घंटाघर, चंद्र घटा, स्टेशन, नयापुरा मस्जिद में चला। रोजेदारों ने सामूहिक रोजा इफ्तार किया। मासूम बच्चों ने पहला रोजा रखा। परिवार के लोगों ने उनका ध्यान रखा। बड़ों ने मासूम बच्चों का हौसला बनाए रखा।

रमजान के पाक महीने से जुड़ी वो 5 बातें जो इसे बनाती हैं खास

अधरशिला मस्जिद में जुमेे की नमाज अदा करते अकीदतमंद।

11 वर्षीय रिदा खान ने रखा पहला रोजा : आकाशवाणी कॉलोनी निवासी डॉ. जफर मोहम्मद ने बताया कि 11 वर्षीय पोती रिदा खान ने उनके द्वारा प्रेरित करने पर पहला रोजा रखा। परिवारजनों ने भी पूरा ख्याल रखा। सामूहिक रुप से घर पर रिदा ने रोजा इफ्तार किया।

10 साल की नाजिया खानम ने रोजा रखकर मांगी सबकी खैरियत: लाडपुरा निवासी रईस खान की बेटी नाजिया ने इस साल अपना पहला रोजा रखा। 10 साल की नाजिया बताती हैं कि उन्हें इसकी प्रेरणा उनके घर से मिली। वे चाहती हैं कि दुनिया में अमन बना रहे। खुदा की रहमत सब पर बनी रहे।

इस बार रमजान में 5 जुमे पड़ेंगे। रमजान का आखिरी जुमा 15 जून को है, यह अलविदा जुमा होगा।

शुरुआत के पहले 10 दिन रहमत वाले हैं। दूसरे 10 दिन बरक्कत वाले। आखिरी 10 दिन मगफिरत के होंगे।

रमजान में रखे जाने वाले रोजे को इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक माना जाता है। इन दिनों तकवा प्राप्त किया जाता है। तकवा का अर्थ है अल्लाह को नापसंद काम ना कर उनकी पसंद के कार्यों को करना।

इस महीने में शब ए कद्र मनाई जाती है। जो कि इस बार 11 जून को हो सकती है। इस दिन मुस्लिम समुदाय रात भर जागकर इबादत करते हैं।

महीने के बाद शव्वाल की पहली तारीख को ईद उल फितर मनाया जाता है। इस महीने फितरा व जकात के कार्यों को प्रधानता दी जाती है। इसलिए इस महीने को नेकियों और इबादतों का महीना कहा जाता है।

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