कोटा| शहर में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में बेरोजगार युवकों को दस साल के लिए दिए गए करीब दो हजार कियोस्क को वापस लेने या किराया लेने के बारे में यूआईटी ने राज्य सरकार से मार्गदर्शन मांगा है। जिनको यह कियाेस्क रोजगार करने के लिए दिए गए थे, उनमें से 50 प्रतिशत से अधिक ने इन्हें बेच दिया। कई में परिवर्तन कर दिया गया।
राज्य सरकार की मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत यूआईटी व नगर निगम प्रशासन ने मिलकर शहर में करीब दो हजार से अधिक कियोस्क का निर्माण किया था। इनके आवंटन के लिए यूआईटी प्रशासन ने आवेदन लिए। जिसकी योग्यता सूची तैयार करके वर्ष 2002 व इसके बाद इनके आवंटन किए गए। जिन लोगों को इन्हें दिया गया, उन्हें केवल दस साल के लिए व्यवसाय करने के लिए दिया गया था। इसके लिए उन्हें केवल अधिकार पत्र दिया गया था। न तो इसका आवंटन किया न ही इसकी रजिस्ट्री या लीज का प्रावधान रखा गया। इसे बेचने का भी किसी को अधिकार नहीं था। आवंटन के बाद जैसे ही दस साल पूरे हुए यूआईटी प्रशासन ने सरकार से मार्गदर्शन करने के लिए कई बार पत्र लिखे लेकिन, उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई न कोई मार्गदर्शन मिला।
बेच दिया कई आवंटियों ने
तलवंडी सहित अन्य इलाकों में आवंटित कियोस्क के स्वरूप को ही आवंटियों ने बदल दिया। इसके अलावा जिन लोगों को यह कियोस्क दिए गए थे, उन्होंने इसे बेच दिया। यूआईटी के अधिकारियों की माने तो पचास प्रतिशत कियोस्क पर दूसरे लोग व्यवसाय कर रहे हैं
सरकार से मांगा
मार्गदर्शन
शहर में जितने भी कियोस्क आवंटित हुए थे, उनकी समयावधि वर्ष 2012 में ही पूरी हो गई। दो दिन पहले विभाग के मंत्री श्रीचंद कृपलानी के साथ हुई बैठक में उनसे कियोस्क के बारे में मार्गदर्शन मांगा गया है। उनसे कहा गया है कि दस साल कभी के पूरे हो गए। इन कियोस्क का आवंटियों को दे दिया जाए, या वापस लेकर दुबारा से आवंटन किया जाए, या फिर उन्हें ले लिया जाए। मंत्री ने शीघ्र ही इस बारे में दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे।