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कोर्ट का फैसला आते ही खुद मरीज छोड़कर चले गए टीटी हॉस्पिटल, स्टाफ के भविष्य पर भी सवाल

3 वर्ष पहले
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सरकारी नौकरी में रहते हुए काली कमाई करने वाले डॉ. आरपी शर्मा ने टीटी हॉस्पिटल के संचालन में जमकर फर्जीवाड़ा किया। कोर्ट द्वारा इस मामले में सजा सुनाए जाने के बाद भास्कर ने केस की पत्रावली खंगाली तो पता चला कि टीटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्रा. लि. का पूरा कंट्रोल डॉ. आरपी शर्मा के हाथ में था।

कोर्ट के फैसले के बाद शुक्रवार को भास्कर टीटी हॉस्पिटल का जायजा लेने पहुंचा। पता चला कि कोर्ट के फैसले के बाद गुरुवार रात से शुक्रवार सुबह तक अस्पताल से सभी मरीज चले गए। यहां मौजूद स्टाफ ने बताया कि कुछ मरीज पोस्ट ऑपरेटिव केयर के लिहाज से एडमिट थे, डॉक्टर नहीं होने से उन्हें भर्ती रखने का कोई औचित्य नहीं था, इसलिए उन्हें दूसरी जगह भेज दिया। यहां मौजूद स्टाफ भी चिंतित था कि अब उनका क्या होगा?

जी+3 में बने इस अस्पताल में 60 बेड है और ऑर्थोपेडिक, स्किन, जनरल सर्जरी, ईएनटी, डेंटल और फिजियोथैरेपी विभाग की नियमित सेवाएं हैं, जबकि अन्य विभागों के लिए ऑनकॉल डॉक्टर बुलाए जाते हैं।

14 बेड का मौसमी बीमारियों का वार्ड है, मेल-फीमेल के लिए अलग-अलग जनरल वार्ड बने हैं। इनके अलावा 4 प्राइवेट व 2 सेमी प्राइवेट रूम तथा 7 बेड का आईसीयू है। फिजियाथैरेपी विभाग में भी 10 बेड है और स्किन के प्रोसीजर करने के लिए भी 3 बेड लगे हुए हैं। पैथोलॉजी लैब, डिजिटल एक्सरे, बेड साइड एक्सरे, सोनोग्राफी जैसी मशीनें हैं।

कोर्ट के आदेश के अनुसार कार्रवाई करेंगे : कलेक्टर

गए तो संजीवनी बूटी लेने थे, लेकिन पूरा पहाड़ ही लाना पड़ा: शर्मा

तत्कालीन एएसपी इंद्र कुमार शर्मा से खास बातचीत

भास्कर ने रिटायर्ड एडिशनल एसपी इंद्र कुमार शर्मा को ढूंढा, जो 15 साल पहले रिटायर हो चुके हैं। शर्मा की अगुवाई में ही इस दिन डॉ. शर्मा के ठिकानों पर रेड हुई थी। उन्होंने बताया कि मैं उस वक्त कोटा में एसीबी का एडिशनल एसपी था। हमारे पास लगातार शिकायतें आ रही थीं कि डॉ. आरपी शर्मा जरूरत से ज्यादा भ्रष्ट है और इन्होंने काफी संपत्ति इकट्ठा कर रखी है। गोपनीय सूत्रों से इनके बारे में जानकारियां जुटाने के बाद हमने एसीबी मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी और गोपनीय तरीके से केस दर्ज कराया। इसके दो दिन बाद ही हमने अलग-अलग टीमें बनाकर इनके अस्पताल समेत अन्य ठिकानों पर रेड की। सर्च में इतनी फाइलें मिली, जिनमें से मौके पर जरूरत की फाइलें छांटना हमारे लिए संभव नहीं था। इसलिए हमने जैसे हनुमान संजीवनी बूटी लेने गए थे और पहाड़ ही ले आए थे, वैसा ही किया। वहां से सारी फाइलें जब्त की। बाद में एक-एक कर स्क्रूटनी की, जिसमें भी काफी समय लगा। यह वाकई चुनौतीपूर्ण कार्य था। मई, 1999 तक मेरी पोस्टिंग कोटा में रहा, इसके बाद मेरा पोस्टिंग एंटी डकैती स्क्वॉयड में भरतपुर हो गया था। मुझे कल ही पता लगा कि इस केस में ऐतिहासिक फैसला हुआ है तो मैंने लोक अभियोजक को फोन करके बधाई दी। मैं 60 साल का होकर रिटायर हो चुका, सैकड़ों केस बनाए, लेकिन इस केस जैसी कड़ी सजा किसी केस में नहीं हुई।

मामले में कलेक्टर गौरव गोयल ने कहा कि अभी फैसले की कॉपी हमें नहीं मिली है, मैंने भी अखबार में ही पढ़ा है। कोर्ट के आदेश के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। वहीं, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. गिरीश वर्मा ने कहा कि कोर्ट का ऑर्डर मिलने के बाद कलेक्टर से चर्चा कर अस्पताल संचालन के संबंध में उचित कार्रवाई करेंगे। फिलहाल हमारे पास ऑर्डर की कॉपी नहीं आई और न ही कलेक्टर के यहां से कोई निर्देश मिले हैं।

एसीबी ने 1998 में टीटी हॉस्पिटल में छापा मारकर बैक डेट के 23 खाली स्टांप किए थे बरामद

कोर्ट के फैसले के बाद शुक्रवार को अस्पताल से 13 अक्टूबर, 1998 को जब्त की गई एक फाइल में कई खाली स्टांप पेपर मिले थे। ये स्टांप वर्ष 1991 से 1995 के बीच गीतांजलि शर्मा, तेजकरण शर्मा, चंद्रशेखर शर्मा, चंद्रकांता शर्मा, हरबंस कौर, डॉ. आरपी शर्मा, गजेंद्र कुमार शर्मा, कंवरपाल, मोहिनी शर्मा, टीटी हॉस्पिटल आदि के नाम से खरीदे हुए थे। इनके अलावा कुछ वाउचर्स भी अस्पताल के डायरेक्टर बताए गए किशनगोपाल से रेवेन्यू स्टांप पर हस्ताक्षर करवाकर फाइल में लगा रखे थे, जो पूरी तरह खाली थे।

खाली पड़े स्टांप 35 निकले। कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड में हेराफेरी करने तथा अवैध स्रोतों से अर्जित आय को एडजस्ट करने के लिए उक्त स्टांप की अग्रिम व्यवस्था की हुई थी। इसी तरह की एक अन्य फाइल में डॉ. आरपी शर्मा व मोहिनी शर्मा के नाम से 25 मार्च, 1992 के 2 स्टांप मिले, जो खाली थे। जाहिर है, ये सारा खेल इसलिए किया गया था कि समय के अनुसार गैरकानूनी ढंग से इन स्टांप को यूज करके अवैध आय को वैध दर्शाया जा सके।

ये हैं सुविधाएं

यहां 6 डॉक्टर और करीब 50 अन्य स्टाफ नियमित सेवारत है। अस्पताल में 5 ऑपरेशन थिएटर हैं, जिनमें से 3 मॉड्यूलर व 2 जनरल ओटी हैं।

अस्पताल का नियमित आउटडोर 1500 से 200 तक है व आम दिनों में इनडोर 8 से 10 पेशेंट का रहता है, मौसमी बीमारियों के सीजन में बढ़ जाता है। राज्य सरकार की भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में भी अस्पताल इमपैनल्ड है।

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