कोटा| प्रदेश के करीब 12000 आयुर्वेद चिकित्सकों की मान्यता सुप्रीम कोर्ट द्वारा निरस्त किए जाने को लेकर शुक्रवार को प्रदेश प्राइवेट चिकित्सा समिति के पदाधिकारियों ने विधायक संदीप शर्मा से मुलाकात की और इन 12000 आयुर्वेद चिकित्सकों को राजस्थान चिकित्सा अधिनियम, 1953 के नियम 36-39 के तहत पंजीकृत करवाने की मांग की। समिति के अध्यक्ष डाॅ. जेके तलवार ने विधायक शर्मा को अवगत कराया कि सर्वोच्च न्यायालय के वर्ष 2010 निर्णय के अनुसार राज्य सरकार ने हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग इलाहाबाद की आयुर्वेद र|/विशारद की उपाधियों को अमान्य कर दिया है। जबकि इससे पूर्व तक सरकार द्वारा आयुर्वेद र|/विशारद की उपाधि को राज्य सरकार द्वारा मान्यता दी जा रही थी। इन उपाधियों के आधार पर कई चिकित्सकों को राज्य सेवा में लिया गया। न्यायालय के निर्देश पर सरकार ने चिकित्सकों के पंजीयन निरस्त कर दिए हैं। उन्होंने विधायक शर्मा इस संबंध में एक विधिक कमेटी का गठन करवाने की भी मांग की।