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जेके लोन में खुलेगा मदर मिल्क बैंक, हर साल 4200 बच्चों को बचाएगा कुपोषण से

3 वर्ष पहले
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शिशु मृत्यु दर को कम करने और कुपोषण खत्म करने के लिए कोटा में नवजात शिशुओं के लिए मदर मिल्क बैंक बनेगा। मिल्क बैंक जेके लोन अस्पताल में खुलेगा जिसका प्रभारी डॉ. जितेंद्र जैन को बनाया जाएगा। रविवार को मेडिकल कॉलेज में हुई बैठक में राज्य सरकार के सलाहकार देवेंद्र अग्रवाल ने कहा कि मिल्क बैंक इसी साल खुलेगा और इस पर 78 लाख रुपए खर्च होंगे।

जेके लोन व नए अस्पताल में हर साल 13 से 14 हजार बच्चों का जन्म होता है। इसमें 30 प्रतिशत यानी करीब 4200 बच्चे प्री-मेच्योर होते हैं। विभिन्न कारणों से इनको मां का दूध नहीं मिल पाता। इसके चलते इनको सही ढंग से पोषण नहीं मिलता और इनका शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है। इसके चलते सरकार ने मदर मिल्क बैंक बनाने की घोषणा की।

शिशु मृत्यु दर में आएगी कमी

एनआईसीयू में भर्ती जिन प्री-मेच्योर नवजातों को चिकित्सकीय कारणों से मां का दूध नहीं मिल पाता उन्हें मिल्क बैंक से निशुल्क दूध मिलेगा। इसके लिए डॉक्टर स्लिप इश्यू करेंगे। 6 घंटे के भीतर दूध का इस्तेमाल करना होगा। इसे सीधे छूने और गर्म करने पर प्रतिबंध रहेगा। इससे एनआईसीयू में विभिन्न कारणों से मरने वाले 100 में से 16 बच्चों की जान बचाई जा सकेगी। मां के दूध से नवजात की रिकवरी 40 प्रतिशत तेजी से होती है।

भास्कर एक्सपर्ट

6 माह तक मां का दूध जरूरी

मदर मिल्क बैंक एनआईसीयू में भर्ती होने वाले बच्चों के लिए बेहद ही लाभदायक होगा। कोटा में साल में करीब 4 से 5 हजार बच्चे प्री-मेच्योर होते हैं, जिन्हें इस दूध की आवश्यकता होती है। बच्चों को छह माह तक पानी तक नहीं दिया जाता। मां के दूध के अभाव में उनकी मौत तक हो जाती है। -डॉ. अमृतलाल बैरवा, एचओडी जेके लोन

मदर मिल्क बैंक के बारे में वो सबकुछ जाे आप जानना चाहते हैं

वो माताएं जो स्तनपान कराती हैं एवं इसके बाद भी उनके पास अतिरिक्त दूध होता है।

जिनके बच्चे को चिकित्सकीय कारणों से स्तनपान से रोक दिया गया है।

जिनके किसी प्रकार की बीमारी नहीं हो और स्टेराइड का सेवन नहीं करती हो।

जिसने पिछले कुछ समय से टीकाकरण नहीं करवाया हो।

जो शराब, तंबाकू या अन्य मादक पदार्थ का सेवन नहीं करती हो।

जिसने टैटू या अन्य गोदना नहीं करवाया हो।

जिनको अन्य कोई चिकित्सकीय परेशानी नहीं हो।

दूध दान देने से माता को लाभ

दूध बनने की क्षमता में वृद्धि होती है।

प्रेग्नेंसी फैट तेजी से घटता है, चेहरे पर ओज व तेज बढ़ता है।

मधुमेह, ब्रेस्ट कैंसर, ओवरी कैंसर व अन्य बीमारियों की आशंका कम हो जाती है।

जयपुर को छोड़कर अन्य स्थानों पर चल रहे मदर मिल्क बैंक में 14 मई तक 27,489 माताओं ने 58,83,290 एमएल दूध दान किया। 17,203 नवजातों को 1,52,354 यूनिट दूध निशुल्क उपलब्ध करवाया। 23,400 यूनिट दूध से अजमेर में 1784 नवजात शिशुओं को लाभांवित किया गया। वर्तमान में 13,620 यूनिट दूध स्टॉक में है।

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हजार नवजातों को मिल चुका है फायदा प्रदेश में

प्री मेच्योर बेबी को बाहर का दूध देने से वे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। मदर मिल्क बैंक उनके लिए वरदान साबित होगा। कोटा में ये दिसंबर से पहले बनकर तैयार हो जाएगा। -देवेंद्र अग्रवाल, सलाहकार, राज्य सरकार

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