कोटा| एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी व नाबार्ड ने रविवार को संयुक्त रूप से उम्मेद गंज कृषि अनुसंधान केंद्र पर विश्व मधुमक्खी दिवस मनाया है। इस मौके पर किसान गोष्ठी व स्टेक होल्डर्स की बैठक हुई। जिसमें कुलपति डॉ. जीएल केशवा ने कहा कोटा संभाग शहद प्रोडक्शन व इसके वैल्यू एडिशन में उभरता हुआ क्षेत्र बन रहा है। किसानों को शहद के वैल्यू एडिशन पर ध्यान देना चाहिए।
डॉ. केशवा ने कहा संभाग में हर साल औसत 4 हजार टन शहद उत्पादित होता है। मधुमक्खी पालन से क्षेत्रीय किसानों को फसल उत्पादन में 15 फीसदी फायदा मिलता है। उम्मेद गंज कृषि अनुसंधान केंद्र पर मधुमक्खी पालन इकाई में तीन रुपए प्रति किलो खर्च पर शहद को प्रोसेस किया जाता है। बैंकों से भी आग्रह किया कि वह मधुमक्खी पालक भूमिहीन किसानों को उनकी जरूरत के आधार पर लोन उपलब्ध करवाए। इस मौके पर नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक राजीव दायमा ने भी किसानों को संबोधित किया। इस मौके पर 3.48 करोड़ के बैंकिंग प्लान का भी विमोचन किया गया।