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8 दिन की मासूम की नाक का दूरबीन से किया ऑपरेशन

3 वर्ष पहले
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मेडिकल कॉलेज कोटा के एमबीएस अस्पताल में एक 8 दिन की एक मासूम की नाक में आई जन्मजात विकृति को ईएनटी विभाग के डॉक्टरों ने दूरबीन से सफल ऑपरेशन कर ठीक कर दिया है। पूर्व में बालिका को सांस लेने में परेशानी हो रही थी। क्योंकि बालिका के नाक की नाक में पर्दा था। आमतौर पर बच्चों के नाक के नथुनों के पीछे पर्दा नहीं होता है। सात हजार बच्चों में एक बच्चे में इस तरह की जन्मजात विकृति होती है।

झालावाड़ निवासी बेबी ऑफ रेखा को झालावाड़ मेडिकल कॉलेज से कोटा मेडिकल कॉलेज में रेफर किया गया था। एमबीएस अस्पताल में बालिका को ईएनटी के डॉ. आरके जैन ने देखा। परीक्षण में उसके नाक के दोने नथूनों में पीछे पर्दा पाया गया। इस कारण मासूम को सांस लेने में परेशानी होती थी। वह मुंह से ही सांस लेती थी। मां का दूध पीते समय उसे सांस लेने में अधिक तकलीफ होती थी। उन्होंने परिजनों से दूरबीन से ऑपरेशन की बात कही, जिस पर वह राजी हो गए। 18 मई को एमबीएस अस्पताल के ईएनटी के ऑपरेशन थियेटर में दूरबीन की सहायता से मासूम की नाक में छेद बनाया। इस कार्य में लगभग एक घंटे का समय लगा। ऑपरेशन में ईएनटी विभाग के डॉ. दीपक, एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. उषा व डॉ. ममता ने सहयोग दिया।

बच्ची की नाक में पर्दा था, सांस लेने में हो रही थी परेशानी, सात हजार में एक बच्चे को होती है इस तरह की विकृति

एमबीएस में मासूम बालिका का दूरबीन से ऑपरेशन करते डॉक्टर।

ये थी चुनौतियां

8 दिन की बच्ची को बेहोश करना

छोटे नथूनों में अौजार से पर्दे तक पहुंचना,

अौजार दिमाग तक पहुंचने का खतरा

सात हजार बच्चों में एक में होता है ऐसी विकृति

ईएनटी के डॉ. आरके जैन ने बताया कि नाक के नथूनों में पर्दा होने की समस्या सात हजार बच्चों में एक में होती है। इसका कारण जन्मजात विकृति है। इसे चिकित्सीय भाषा में पाइलेट्रल कोयनल एट्रीजिया कहते हैं। इससे बच्चे को सांस लेने में परेशानी होती है।

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