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मॉक ड्रिल में समय पर नहीं पहुंचे 3 विभागों के अधिकारी

3 वर्ष पहले
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कोटा| रेलवे अधिकारियों, कर्मचारियों व मेडिकल स्टाफ की सतर्कता जांचने के लिए रविवार को कोटा रेल मंडल में मॉक ड्रिल किया गया। जिसमें मेन क्रॉसिंग गेट पर मालगाड़ी के ट्रैक्टर ट्रॉली के टकराने से चार व्यक्तियों के घायल होने की कहानी बनाई गई। मॉक ड्रिल के दौरान कॉमर्शियल, ऑपरेटिंग, एसएंडटी के अधिकारी और कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचे।

मॉक ड्रिल के लिए रविवार दोपहर लगभग 2.08 बजे हूटर बजने लगे। कुछ ही समय में एडीआरएम विनीत पांडे, सीनियर डीएसओ डॉ. आरएन मीणा, आरपीएफ के एएससी वंशराज सरोज, डीईएन सेंट्रल रितुराज, सीनियर डीईई टीआरडी एपी सिंह, मेडिकल रिलीफ वैन इंचार्ज डॉ. अनिल उपाध्याय, डॉ. बीपंडा, डॉ. दीपक व नर्सिंग स्टाफ, मैकेनिकल, कैरिंज व इंजीनियरिंग स्टाफ भी स्टेशन पर पहुंचे। लेकिन ऑपरेटिंग, कॉमर्शियल व सिग्नल विभाग के अधिकारी व कर्मचारी काफी देर तक स्टेशन पर नहीं पहुंचे। बाद में मेडिकल रिलीफ वैन को लगभग 2.20 बजे तथा एआरटी को 2.35 बजे रवाना कर दिया गया। विशेष ट्रेन मौके पर पहुंची तो रेल कर्मियों व अधिकारियों ने मॉक ड्रिल किया। इसमें घायलों को तुरंत मेडिकल सहायता देने का रिहर्सल किया। इसी प्रकार ट्रैक्टर ट्रॉली को ट्रैक से हटाने व इंजन की खराबी को दुरुस्त करने का रिहर्सल किया।

एडीआरएम ने मोर्चा संभाला

मॉक ड्रिल के दौरान व्यवस्थाओं को देखने के लिए एडीआरएम आलोक अग्रवाल व उनकी टीम कोटा रेलवे कंट्रोल रूम में बैठे हुए थे। साथ ही मौके पर पहुंची एआरटी व मेडिकल टीम को निर्देश दे रहे थे।

तीन माह में एक बार मॉक ड्रिल

रेलवे अधिकारियों व कर्मचारियों की सतर्कता जांचने के लिए हर तीन माह में एक बार मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाता है। इसमें अधिकारियों व कर्मचारियों की सतर्कता की जांच की जाती है।

मॉक ड्रिल के दौरान समय पर नहीं पहुंचने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों पर कार्रवाई होती है। रिपोर्ट में इसकी एंट्री की जाती है। संबंधित विभाग को रिपोर्ट भेजी जाती है ताकि उस पर कार्रवाई की जा सके। -डॉ. आरएन मीणा, सीनियर डीएसओ

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