कोटा| आज मानव सतत दौड़े जा रहा है, एक ऐसी दौड़ जिसका कोई अंत नहीं, कोई मंजिल नहीं, कोई अभिप्राय नहीं। विश्राम का कहीं नाम नहीं, कोई काम नहीं। आज हम वस्तुओं, सुविधाओं की प्राप्ति और संग्रह में जुट गए हैं। जिनकी न कोई सीमा है न अंत। यह बात कुन्हाड़ी में ईश्वरीय विद्यालय के केंद्र में चल रहे अलविदा तनाव शिविर में ब्रह्मकुमारी पूनम बहन ने कही।