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सात दिन पहले आदर्श बने पीएचसी की इमरजेंसी पर ताला डेढ़ घंटे तक तड़पती रही गर्भवती, दोपहर में कराया प्रसव

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | कोटड़ी/सवाईपुर

आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सवाईपुर में शुक्रवार सुबह 6:30 बजे ढेलाणा के ग्रामीण गर्भवती को लेकर पहुंचे। अस्पताल पर ताला लगा मिला। इमरजेंसी सेवा नहीं मिलने से गर्भवती दर्द से कराहती रही। इस पीएचसी का आदर्श में चयन होने पर 7 अप्रैल को ही उद्घाटन हुआ था।

परिजनों ने बताया कि अस्पताल में कोई नहीं था। सुबह 8 बजे स्टाफ पहुंचा तब गर्भवती इंदिरा को भर्ती किया गया। हमने डॉक्टर को फोन पर सूचना दी, लेकिन उन्होंने बताया कि अस्पताल सुबह 8 बजे खुलता है। डॉक्टर गौरीशंकर कनवा तीन दिन के अवकाश पर थे। इस पर मेलनर्स ने दोपहर 1:40 बजे प्रसव कराया। आदर्श पीएचसी होने के बावजूद अस्पताल में इमरजेंसी सेवा नहीं है। रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक अस्पताल पर ताला लगा रहता है। जबकि नियमानुसार प्रत्येक अस्पताल में इमरजेंसी सेवा होना जरूरी है। पीएचसी में एक डॉक्टर, एक आयुष चिकित्सक व दो मेलनर्स हैं। एएनएम का पद रक्त है। एक मेलनर्स को डेपुटेशन पर लगा रखा है। बड़ा सवाल यह है कि आदर्श घोषित करने के बावजूद यहां पर्याप्त सुविधाएं व स्टाफ नहीं है। ऐसे में मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।

जिले में 22 में से 12 पीएचसी में एक भी डॉक्टर नहीं

सवाईपुर . पीएचसी के बाहर गर्भवती महिला के पास बैठे चिंतित परिजन।

भास्कर संवाददाता | कोटड़ी/सवाईपुर

आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सवाईपुर में शुक्रवार सुबह 6:30 बजे ढेलाणा के ग्रामीण गर्भवती को लेकर पहुंचे। अस्पताल पर ताला लगा मिला। इमरजेंसी सेवा नहीं मिलने से गर्भवती दर्द से कराहती रही। इस पीएचसी का आदर्श में चयन होने पर 7 अप्रैल को ही उद्घाटन हुआ था।

परिजनों ने बताया कि अस्पताल में कोई नहीं था। सुबह 8 बजे स्टाफ पहुंचा तब गर्भवती इंदिरा को भर्ती किया गया। हमने डॉक्टर को फोन पर सूचना दी, लेकिन उन्होंने बताया कि अस्पताल सुबह 8 बजे खुलता है। डॉक्टर गौरीशंकर कनवा तीन दिन के अवकाश पर थे। इस पर मेलनर्स ने दोपहर 1:40 बजे प्रसव कराया। आदर्श पीएचसी होने के बावजूद अस्पताल में इमरजेंसी सेवा नहीं है। रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक अस्पताल पर ताला लगा रहता है। जबकि नियमानुसार प्रत्येक अस्पताल में इमरजेंसी सेवा होना जरूरी है। पीएचसी में एक डॉक्टर, एक आयुष चिकित्सक व दो मेलनर्स हैं। एएनएम का पद रक्त है। एक मेलनर्स को डेपुटेशन पर लगा रखा है। बड़ा सवाल यह है कि आदर्श घोषित करने के बावजूद यहां पर्याप्त सुविधाएं व स्टाफ नहीं है। ऐसे में मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।

जिलेभर में एक सैटेलाइट अस्पताल, 13 सीएचसी, 22 पीएचसी और 43 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं। 12 पीएचसी ऐसे हैं जहां एक भी डॉक्टर नहीं हैं। जिले के अस्पतालों में डॉक्टरों के 285 पद स्वीकृत हैं, जबकि 117 डॉक्टर कार्यरत हैं। 168 पद खाली हैं। एएनएम के 670 पद हैं, जबकि 490 ही कार्यरत हैं। सिर्फ जीएनएम प्रथम व द्वितीय के पद पर्याप्त हैं।

सवाईपुर आदर्श पीएचसी के डॉ. गौरीशंकर कनवा अवकाश पर हैं। अब 24 घंटे इमरजेंसी सेवा शुरू कर दी जाएगी। आसपास के पीएचसी के स्टाफ को रोटेशन पर सवाईपुर लगाएंगे। आज से ही नाइट में भी स्टाफ रहेगा। डॉ. राकेश पांडे, बीसीएमएचओ, कोटड़ी

मैं तीन दिन अवकाश पर हूं। सुबह पीएचसी में ग्रामीण गर्भवती को लेकर आए थे, लेकिन किसी ने ऐसी सूचना नहीं दी। जानकारी मिलती तो मेलनर्स पहुंच जाता। अस्पताल खुलने पर इलाज शुरू कर दिया गया। प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा स्वस्थ है। स्टाफ की कमी के कारण रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक इमरजेंसी सेवा नहीं है। डॉ. गौरीशंकर कनवा, सवाईपुर पीएचसी

एक्सपर्ट व्यू...
प्रत्येक अस्पताल में इमरजेंसी सेवा जरूरी, दर्द शुरू होने पर 24 घंटे में प्रसव कराना जरूरी... कोटड़ी के सेवानिवृत्त गायनिक डॉ. रमेश डीडवानिया ने बताया कि प्रसव का प्रत्येक केस इमरजेंसी की श्रेणी में आता है। प्रसव पीड़ा होने के बाद 24 घंटे में प्रसव होना जरूरी है। इससे ज्यादा समय लेेने पर बच्चे को खतरा हो सकता है। इसलिए प्रसव केस आते ही तुरंत अस्पताल में लेकर प्राथमिक उपचार शुरू करना चाहिए। प्रत्येक स्तर के अस्पताल में इमरजेंसी सेवा होना जरूरी है। अगर अस्पताल में एक्सपर्ट डॉक्टर नहीं है तो प्राथमिक उपचार कर तुरंत रैफर कार्ड बनाना चाहिए। इमरजेंसी का मतलब ही यह है कि मरीज की जान की रक्षा करना। यहां एक डॉक्टर होना ही चाहिए। इमरजेंसी सेवा पर ताला नहीं होना चाहिए। जहां एक डॉक्टर है वह ऑन कॉल रहता है। डॉक्टर को मुख्यालय पर रहना जरूरी होता है। डॉक्टरों की कमी के कारण कंपाउंडर प्रसव कराते हैं। कंपाउंडरों को ट्रेनिंग दे रखी है।

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