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भागवत कथा सुनने से दूर हो जाते हैं कष्ट : राकेश शास्त्री

3 वर्ष पहले
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भागवत कथा सुनते हुए श्रद्धालु।

शिलानगर में आयोजित हो रही है भागवत कथा

भास्कर संवाददाता.

करैरा अनुविभाग के ग्राम शिलानगर में संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार को कथा वाचक राकेश शास्त्री ने श्रीमद् भागवत कथा का संक्षिप्त में श्रोताओं को सार बताया। कथा वाचक ने अपनी अमृतमयी वाणी से कथा का वाचन शुरू करते हुए कहा कि भागवत अवरोध मिटाने वाली उत्तम अवसाद है। भागवत का आश्रय करने वाला कोई भी दुखी नहीं होता है। भगवान शिव ने सुखदेव बनकर सारे संसार को भागवत सुनाई है।

उन्होंने श्रोताओं को कर्मों का सार बताते हुए कहा कि अच्छे और बुरे कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है। उन्होंने भीष्म पितामह का उदाहरण देते हुए कहा कि भीष्म पितामह 6 महीने तक बाणों की शैय्या पर लेटे थे। जब भीष्म पितामह बाणों की शैय्या पर लेटे थे तब वे सोच रहे थे कि मैंने कौन सा पाप किया है जो मुझे इतने कष्ट सहन करना पड़ रहे है। इसके बाद भगवान कृष्ण भीष्म पितामह के पास आते है। तब भीष्म पितामह कृष्ण से पूछते है कि मैंने ऐसे कौन से पाप किए है कि बाणों की शैय्या पर लेटा हूं पर प्राण नहीं निकल रहे है।

कथा प्रधान का ग्रंथ है

भागवत भाव प्रधान व भक्ति प्रधान ग्रंथ है। भगवान पदार्थ से परे है। प्रेम के अधीन है। प्रभु को मात्र प्रेम ही चाहिए। अगर भगवान की कृपा दृष्टि चाहते है तो उसको सच्चाई की राह पर चलना चाहिए। भगवान का दूसरा नाम ही सत्य है। सत्यनिष्ठ प्रेम के पुजारी भक्त भगवान के अति प्रिय होते है। कलयुग में कथा का आश्रय ही सच्चा सुख प्रदान करता है। कथा श्रवण करने से दुख और पाप मिट जाते है।

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