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शिलान्यास और लोकार्पण अब जनप्रतिनिधि से नहीं करवाए तो संबंधित अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
भास्कर संवाददाता | कुचामन सिटी
चुनावी साल में सरकार नाराजगी दूर करने के लिए कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाह रही। इसी कारण पिछले कुछ दिनों से नित नए आदेश जारी किए जा रहे हैं। ताजा आदेश सरकारी भवनों के शिलान्यास या लोकार्पण को लेकर आया है।
आदेश में किसी भी विभाग द्वारा लोकार्पण-शिलान्यास समारोह में जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है। ऐसे मामले में संबंधित अधिकारी को विधानसभा के विशेषाधिकार हनन का दोषी भी माना जा सकता है। राज्य सरकार ने यह कदम विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न विकास कार्यों का श्रेय सत्तारूढ़ दल को दिलाने के लिए उठाया है।
इससे जनप्रतिनिधियों को यह साबित करने का मौका मिलेगा कि सरकार ने विकास के काम किए हैं। सरकार की ओर से प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग के चीफ सेक्रेटरी एनसी गोयल के माध्यम से सभी विभागों को लिखित में आदेश जारी किया गया है। इस आदेश में साफ कहा है कि सार्वजनिक राशि के उपयोग से बनने वाले सरकारी भवनों के शिलान्यास या लोकार्पण समारोह में जनप्रतिनिधि जैसे सांसद, विधायक, जिला प्रमुख, प्रधान, निकाय प्रमुख, सरपंच या अन्य जनप्रतिनिधियों को आवश्यक रूप से आमंत्रित किया जाए। किसी राजकीय उपक्रम बोर्ड निगम या स्वायत्तशासी संस्थान के भी ऐसे कार्यक्रम हो उसमें भी जनप्रतिनिधियों को आवश्यक रूप से आमंत्रित किया जाए। विभागों को ये निर्देश भी दिए हैं कि राजकीय भवनों के शिलान्यास उद्घाटन आदि कार्यक्रम जनप्रतिनिधियों द्वारा ही संपन्न कराए जाए।
हर सरकार के आखिरी साल में होते हैं शिलान्यास-उद्घाटन
गौरतलब है कि सरकार के कार्यकाल के आखिरी महीनों में शिलान्यास और उद्घाटनों की अफरातफरी मचती है। इस दौरान केवल शिलान्यास तथा उद्घाटन के ही कार्यक्रम महीनों तक होते हैं। पिछली गहलोत सरकार में भी ऐसा ही हुआ था और अब भी पिछले 2 महीने से ऐसा ही होने जा रहा है।
सरकारी भवनों के शिलान्यास व लोकार्पण को लेकर प्रशासनिक विभाग ने दिए आदेश
...तो माना जाएगा विशेषाधिकार हनन का दोषी
आदेश में राजस्थान सिविल सेवाएं आचरण नियम (1971) के प्रावधानों का जिक्र करते हुए यह भी चेताया है कि निर्देशों की अवहेलना करने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई करने का प्रावधान है। साथ ही 6 मार्च 2018 को दी गई अध्यक्षीय व्यवस्था के अनुसार निर्देशों की अवहेलना करने पर संबंधित अधिकारी को विधानसभा के विशेषाधिकार हनन का दोषी भी माना जा सकता है।