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1 करोड़ की मांग, मिल रहा 18 लाख लीटर ही पानी नतीजा, खारा पानी पीने की मजबूरी और प्रदर्शन

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | कुचामन सिटी

कुचामन सिटी में शहरवासियों को पानी की मांग की तुलना में केवल नाम मात्र की आपूर्ति की जा रही है। विभिन्न मोहल्लों व कॉलोनियों में लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। आलम ये है कि गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ ही पेयजल संकट की स्थिति ओर ज्यादा बिगड़ने लगी है। पेयजल किल्लत को लेकर आए दिन विभिन्न क्षेत्रों में जलदाय विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि यह हालात कुछ ही दिनों में बने हैं।

शहर में बीते 2 सालों में ट्यूबवैलों से पानी का उत्पादन कम हुआ है, वहीं पानी की गुणवत्ता भी लगातार घटती गई। जबकि पानी में हानिकारक तत्वों की मात्रा लगातार बढ़ती गई। इसके बावजूद जलदाय विभाग के अधिकारी पानी उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हो रहे हैं। नतीजतन शहर के लोगों के कंठ तर तो हुए नहीं, अलबत्ता उसके बदले में खारा पानी पीने को मजबूर हो रहे हैं। जलदाय विभाग ने 2 सालों में शहर के लोगों को जल्द पानी उपलब्ध कराने और बड़े-बड़े प्रोजेक्ट के नाम पर छलावा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसी कारण 2 सालों में 2 दर्जन से ज्यादा आंदोलन-प्रदर्शन किए जा चुके हैं। दरअसल शहर के 35 वार्डों में आपूर्ति के लिए पहले जो कुएं और ट्यूबवैल थे, उनमें से अधिकांश में या तो पानी की कमी हो गई या फिर कई सूख चुके हैं।

कुचामन की तस्वीर: एक दिन का पानी जुटाने ठेले पर बर्तन लेकर पहुंची महिलाएं
कुचामन सिटी.एक नल से ठेले पर पानी का जुगाड़ करते बच्चे व महिलाएं।

अनदेखी
2 साल से 8 ट्यूबवैल का प्रस्ताव फाइलों में
जलदाय विभाग ने पूर्व में 1.44 करोड़ की लागत से 13 ट्यूबवैल बनाने का प्रस्ताव भिजवाया था, लेकिन तकनीकी कारणों से दुबारा करीब 1 करोड़ के प्रस्ताव में 8 नए ट्यूबवैल बनाने का प्रस्ताव भेजा। लेकिन आलम ये है कि ये प्रस्ताव आज तक फाइलों से बाहर नहीं निकल पाए हैं। 2 साल बाद भी स्थिति जस की तस है।

हालात : स्थिति यह है कि 2 साल पहले 1 करोड़ लीटर प्रतिदिन की मांग की तुलना में करीब 40-45 लाख लीटर पानी मिल रहा था, वह अब घटकर 18 लाख लीटर ही रह गया है। ऐसे में अब बीते 2-3 माह से पेयजल आपूर्ति का अंतराल 72 घंटे हो गया है। चिंताजनक बात यह है कि अभी भी प्रत्येक शहरवासी के हिस्से में केवल 3 बाल्टी रोजाना के हिसाब से पानी आ रहा है।

नियम | प्रति व्यक्ति 100 लीटर मिले पानी, मिल रहा 18 ली.
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार कुचामन शहर की जनसंख्या 61969 थी। विभाग वर्तमान में इसे 71389 मान रहा है। इसके अलावा करीब 30000 प्लोटिंग जनसंख्या जैसे स्कूल, कॉलेज, कोचिंग, डिफेंस संस्थानों समेत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों की आंकी गई है। इससे जनसंख्या का यह आंकड़ा 101389 तक पहुंच रहा है। विभाग प्रति व्यक्ति 100 लीटर प्रतिदिन की आवश्यकता मान रहा है। इससे वर्तमान में 1 करोड़ लीटर से ज्यादा पानी की मांग है। जबकि 3 कुएं और 18 ट्यूबवैल से केवल 17.93 लाख लीटर पानी ही मिल रहा है।

अधूरे वादे
शहर में करीब दो साल पूर्व जलसंकट की स्थिति बनी तो एईएन ऋषिकुमार शर्मा ने सबसे पहले जलापूर्ति 2 दिन में एक बार शुरू की। नई ट्यूबवैलों का प्रस्ताव बनाया। कई बार संशोधन भी किए। लेकिन इस परियोजना को अमलीजामा नहीं पहना पाए। नतीजा, शहर में दिन-प्रतिदिन जल संकट गहराता गया। उनकी उम्मीद केवल नहरी पानी पर टिकी हुई है। इसके बाद ही जलसंकट से राहत की उम्मीद बांधे हुए है।

समाधान के लिए 2 अधिकारियों के थोथे ही साबित होते रहे दावे
यह तस्वीर है दल्लाबालाजी रोड की है। पीएचईडी द्वारा आपूर्ति नहीं किए जाने पर लोगों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यहां स्थित 5-7 मोहल्लों में करीब 500 से ज्यादा परिवार के लोगों के दिन की शुरुआत पानी की समस्या के साथ होती है। इन परिवारों के लिए एक निजी ट्यूबवेल से जुड़ी यह नल ही एकमात्र सहारा है। लोगों को मजदूरी पर जाने से पहले यहां से पानी का जुगाड़ करने की मजबूरी है। महिलाओं से लेकर बच्चों तक छोटे-बड़े बर्तन लिए पानी जुटाते देखे जा सकते हैं।

एसडीएम रामसुख गुर्जर हर सप्ताह साप्ताहिक समीक्षा बैठक में जलदाय विभाग के अधिकारियों को जलसंकट दूर करने के निर्देश देते रहे। समस्या की जड़ तक जाने की जहमत उन्होंने भी नहीं उठाई। यहां तक कि पानी के लिए हुए हर प्रदर्शन के बाद जलदाय विभाग के एईएन की बात पर आश्वासन दिए। गत दिनों पानी के लिए बड़े आंदोलन के ऐलान के बाद एईएन को लेकर फील्ड में गए तो उन्हें वास्तविकता का पता चला।

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