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कुल्लू अस्पताल के विकलांगता पुनर्वास केंद्र में अब मिलेगी बैरा टेस्ट की सुविधा

3 वर्ष पहले
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रेड क्रास सोसायटी द्वारा संचालित जिला कुल्लू विकलांगता पुनर्वास केंद्र में बैरा टेस्ट के लिए अत्याधुनिक मशीन स्थापित करने की योजना को अंतिम मुहर लगा दी गई है जल्द ही यहां अत्याधुनिक मशीन स्थापित की जाएगी जिससे जिला कुल्लू के लोगों को काफी ज्यादा सहायता मिलेगी। यूनुस, डीसी जिला कुल्लू

विकलांगों के ऑनलाइन विकलांगता प्रमाण पत्र सुविधा देने की भी योजना

गौरीशंकर | कुल्लू

क्षेत्रीय अस्पताल के प्रांगण में चल रहे विकलांगता पुनर्वास केंद्र में दिव्यांगों के लिए बैरा टेस्ट की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए रेडक्रास सोसायटी ने एक अत्याधुनिक मशीन स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस मशीन के माध्यम से दिव्यांगों का बैरा टेस्ट होगा। बैरा टेस्ट के जरिए बहरेपन की पचान की जाती है। मशीन के माध्यम से दिव्यांगों के बहरेपन की प्रतिशतता मापना आसान हो जाएगा और जिसके लिए अब तक आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता था लेकिन अब क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के प्रांगण में स्थापित विकलांगता पुनर्वास केंद्र में मिल जाएगी। डीसी कुल्लू यूनुस के अनुसार जिला विकलांगता पुनर्वास केंद्र में बहरेपन की पहचान के लिए अत्याधुनिक बैरा टेस्ट की मशीन भी स्थापित की जाएगी। अभी केवल इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज शिमला और मेडिकल कालेज टांडा में ही बैरा टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है।

ये है बैरा टेस्ट| डॉक्टरों के अनुसार बैरा टेस्ट एक आधुनिक मशीनी जांच है। यह जांच नवजात शिशु से लेकर बड़े लोगों के बहरेपन को जानने के लिए कारगर साबित होगी। इस प्रकार की सुविधा विशेषकर स्पेशियलिटी अस्पताल में ही उपलब्ध होती है। इसमें कान की बीमारियां फुंसी, फोड़े, मोम का इकट्ठा होना, सुनाई देना जैसी अन्य बीमारियों की जांच की जाती है। सुनने की क्षमता की जांच ऑडियोमीटरी तकनीक से की जाती है। इसमें इलेक्ट्रोड को चेस्ट के बजाय स्कल (खोपड़ी) पर लगाकर बहरेपन या सुनने की क्षमता का पता लगाया जाता है।

नहीं लगाने पड़ेंगे शिमला टांडा के चक्कर बहरेपन के बैरा टेस्ट के लिए पूरे प्रदेश भर से लोगों को आईजीएमसी या फिर टांडा मेडिकल कॉलेज जाना पड़ रहा है। जिसमें कइयों का नंबर 6-6 महीने तक नहीं लग पाता ऐसे में इसके लिए प्रदेश भर के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन कुल्लू के विकलांग पुनर्वास केंद्र में स्थापित होने वाली इस मशीन से कुल्लू जिला के लोगों को राहत मिलेगी।

क्षेत्रीय स्तर के अस्पताल में प्रदेश की पहली मशीन होगी क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के इस विकलांग पुनर्वास केंद्र में लगने वाली यह ब्रेन स्टोम इवोक्ड रिस्पोंस ऑडियोमेट्री (बैरा) मशीन होगी। इसके शुरू होने से एक ओर जहां चिकित्सकों को बहरापन जानने में सहायता मिलेगी, वहीं हैंडिकेप्ट प्रमाण पत्र बनाने के लिए भी मशीन से रिपोर्ट आसानी से मिल जाएगी। यह मशीन रोगियों में कितना बहरापन है, इसे तुरंत बता देगी।

ऐसे होता है उपचार डॉक्टरों के अनुसार कई बार जो बहरे होते हैं वे ठीक से बता नहीं पाते हैं और डॉक्टरों को भी बहरेपन की प्रतिशतता को जानना मुश्किल हो जाता है। लेकिन बैरा टेस्ट के जरिए बहरेपन की प्रतिशतता बिल्कुल सही तरीके से जांची जा सकती है। इस टेस्ट के लिए राइट-लेफ्ट कान चिक के पास, सिर पर कैथोड लगाया जाता है। इसके बाद एक्टिविटी शुरू हो जाती है। कम्प्यूटर में साउंड वेव दिखने लगते हैं। पिक्चर अगर स्पष्ट दिखाई दे रही हो, तो इसका मतलब हियरिंग लॉस है।

प्रमाण पत्र बनाने में गड़बड़ी रुकेगी|खासकर विकलांगता प्रमाण पत्र बनाने के लिए बैठने बाले मेडिकल बोर्ड में भी इस अत्याधुनिक मशीन का फायदा मिलेगा और प्रमाण पत्र में सिफारिश लगाकर बनने वाले प्रमाण पत्रों पर भी रोक लगेगी। इस मशीन की जांच के बाद जितनी प्रतिशतता बहरेपन की होगी वही प्रमाण पत्र के लिए मान्य होगी। ऐसे में प्रमाण पत्र बनाने में होने वाली गड़बड़ियां भी रुकंेगी।

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