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रोहित मर्डर मामला : हाईकोर्ट का केस सीबीआई को सौंपने से इनकार, कहा सीआईडी कर रही बेहतर जांच
कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी में करीब ढाई साल पहले हुए डॉ. रोहित मर्डर मामले की जांच हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंपने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने सीआईडी क्राइम ब्रांच की जांच पर संतुष्टि जताने के बाद यह फैसला सुनाया।
हाईकोर्ट ने सीआईडी को आदेश दिए कि जुलाई महीने तक इस मामले की जांच की प्रोग्रेस रिपोर्ट सौंपे। रोहित के पिता ने सीआईडी जांच पर असंतुष्टि जताते हुए कोर्ट से मामले को जांच के लिए सीबीआई को सौंपने की गुहार लगाई थी। बुधवार को सीआईडी ने मामले की जांच को लेकर हाईकोर्ट में तथ्य रखे। कोर्ट ने सीआईडी क्राइम ब्रांच की जांच पर संतुष्टि जताई और कहा कि एजेंसी अच्छा काम कर रही है। इसलिए जांच पूरी करने के लिए सीआईडी को और समय देने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
भाटी गांव के रोहित का शव 14 अक्टूबर 2015 को ज्वालामुखी के नजदीक कुएं से बरामद किया था। पेशे से रोहित डॉक्टर थे। वह ईसीएचएस में सेवाएं दे रहे थे। 13 अक्टूबर को वह कुल्लू से अपने घर के लिए निकला था, मगर घर नहीं पहुंचा और 14 को उसकी लाश ही मिली। शव मिलने के बाद पिता ने हत्या का संदेह जताया था। पिता के संदेह के आधार पर पुलिस ने ज्वालामुखी थाना में हत्या का मामला दर्ज किया, लेकिन पुलिस केस की गुत्थी सुलझा नहीं पाई। कई महीनों की जांच में पुलिस के असफल रहने पर सितंबर 2016 में यह केस सीआईडी को सौंपा गया। तब से सीआईडी केस की तफ्तीश कर रही है। इस केस की सुनवाई न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी और संदीप शर्मा की खंडपीठ में चल रही है। खंडपीठ ने सीआईडी को जुलाई महीने में सील्ड कवर में प्रोग्रेस रिपोर्ट फाइल करने के आदेश दिए हैं।