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वाहनों के लिए लाशणी सड़क नहीं थी पास, दो साल से सरपट दौड़ रही हैं गाड़ियां

3 वर्ष पहले
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शैताझौल-लाशणी मार्ग विभाग ने सिर्फ 1400 मीटर तक ही निकाला है और आगे की सड़क ग्रामीणों ने स्वयं ही निकाली है। लेकिन लोक निर्माण विभाग ने अभी तक इस सड़क को वाहनों के लिए पास नहीं किया है। जबकि 1400 मीटर सड़क से आगे की सड़क को विभाग ने निकालने के लिए डीपीआर नाबार्ड को भेजी है जिसमें डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक का खर्चा होगा। - महेंद्र सिंह, जेई, लोक निर्माण विभाग

प्रशासन, लोक निर्माण विभाग बना रहा तमाशबीन, हादसे में पांच की जान गई तो खुल गई पोल, विभाग ने 1400 मीटर व ग्रामीणों ने खुद ही निकाली है पांच किलोमीटर सड़क

खतरे में ग्रामीणों की जानें, हर दिन हो रही है दर्जनों वाहनों की आवाजाही

गौरीशंकर | कुल्लू

मणिकर्ण घाटी के शैताझोल-लाशणी सड़क में हुए सड़क हादसे में पांच की जान गंवाने के बाद बड़ा खुलासा हुआ है।

शैताझोल से लेकर लाशनी तक करीब साढ़े 6 किलोमीटर सड़क बनी हुई है। लेकिन इस सड़क में वाहनों की आवाजाही की अनुमति अभी तक नहीं मिली है। क्याेंकि विभाग ने इस साढ़े 6 किलोमीटर में से सिर्फ 1400 मीटर सड़क का ही निर्माण किया है जबकि 5 किलोमीटर सड़क क्षेत्र के ग्रामीणों ने खुद निर्माण किया है। विभाग ने इस सड़क को वाहनों की आवाजाही के लिए पास नहीं किया है, लेकिन उसके बावजूद भी हर दिन दर्जनों वाहनों की आवाजाही इस मार्ग में हो रही है। नतीजा यह हुआ कि रविवार को ओवरलोड टाटा सूमो गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई और एक मासूम समेत पांच लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा और 11 लोग जख्मी हो गए हैं।

जिसमें सीधे तौर पर विभाग और प्रशासन की लापरवाही झलक रही है। रोचक बात तो यह है कि ग्रामीणों ने जिस सड़क का निर्माण किया है विभाग ने इस सड़क पर सड़क बनाने के लिए डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक की डीपीआर नाबार्ड को भेजी है लिहाजा, डीपीआर स्वीकृत होने के बाद ग्रामीणों द्वारा बनाई गई इस सड़क पर अपनी और सड़क बनाएगा। लिहाजा, विभाग ने 4 किलोमीटर 650 मीटर सड़क निर्माण के लिए डीपीआर नाबार्ड को भेज रखी है।

स्टेट हेड से हुआ 1400 मीटर सड़क का निर्माण | जानकारी के अनुसार जिस 1400 मीटर सड़क का निर्माण लोक निर्माण विभाग ने किया है उसे स्टेट हेड के पैसे से निकाला गया है। लेकिन इस सड़क में भी अभी तक वाहनों की आवाजाही की अनुमति नहीं है। जबकि ग्रामीणों द्वारा बनाई गई यहां से आगे की सड़क विभाग के कागजों में नहीं है जिसके चलते इस मार्ग में विभाग की ओर से अभी तक किसी तरह तरह के वाहनों की आवाजाही की अनुमति नहीं है।

हर रोज चल रहा मौत का खेल, विभाग बना मूक दर्शक |लिहाजा, पिछले करीब दो सालों से इस सड़क में हर रोज मौत का खेल चलता रहा। जिसे न तो विभाग ने रोकने की कोशिश की और न ही प्रशासन के अधिकारियों ने इसकी सुध ली। जबकि राजनेता अपना राजनीति लाभ के लिए खामोशी धारण करते रहे। लिहाजा, विभाग, प्रशासन की लापरवाही और राजनेताओं की खामोशी लोगों की जान की दुश्मन बन गई।

1400 मीटर सड़क जो विभाग ने बनाई वो भी पास नहीं | मजेदार बात तो यह है कि शेताझोल से लेकर लाशनी तक की सड़क में विभाग ने अभी तक सिर्फ 1400 मीटर सड़क ही बनाई है, लेकिन इस सड़क को अभी तक वाहनों के लिए पास नहीं किया गया है। इसके अलावा आगे की 4.650 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए विभाग ने अभी डीपीआर भेजी है जिसमें डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक के खर्चा होने का अनुमान लगाया गया है। लेकिन ग्रामीण अपने ही दम पर इस सड़क को गांव तक पहुंचा चुके हैं।

शवों के पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंपे | मणिकर्ण घाटी के जाच्छणी-लाशनी मार्ग में हुए सड़क हादसे का शिकार हुए मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम करने के बाद परिजनों को सौंप दिए हंै। सोमवार को पांचों मृतकों के शवों को परिजनों को सौंप दिया है। जबकि गंभीर रूप से घायल चालक सन्नी को पीजीआई के रेफर कर भेज दिया है। जबकि दस घायलों का उपचार क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में चल रहा है। एसडीएम कुल्लू अमित गुलेरिया ने बताया कि घायलों को दस दस हजार और मृतकों के परिजनों को 20-20 हजार रुपए प्रशासन की ओर से जारी किए गए हैं। मृतकों में 37 वर्षीय विशन दास पुत्र बाला राम हुरण, 40 वर्षीय विद्या देवी प|ी बुद्धि सिंह नरोगी, 63 वर्षीय उतम चंद पुत्र डुगलू राम जीया, 16 वर्षीय व्रिकमू देवी पुत्री हरि बागावाई सहित 1 वर्षीय मासूम रिया देवी शामिल है

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