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हादसे का शिकार टिकम राम के डायफरमेटिक हार्निया का सफल ऑपरेशन

3 वर्ष पहले
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दिल और छाती का ऑपरेशन करने वाले विशेषज्ञ करते हैं इस तरह का ऑपरेशन

भास्कर न्यूज |कुल्लू

क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में सर्जन डॉ. आशीष चाब्बा की टीम ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो बड़े अस्पतालों में भी अकसर कम देखने को मिलता है। डॉक्टर आशीष की टीम ने क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में डायफरमेटिक हार्निया के एक ऐसे ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है जिसका ऑपरेशन पीजीआई चंडीगढ़ में ही संभव था लेकिन सर्जन डॉक्टर आशीष चाब्बा, एनेस्थेटिस्ट डॉ. राजीव, डॉ. सुशील सहित निर्मला, प्रकाश आदि की टीम ने ऐसे ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। डायफरमेटिक हार्निया का यह ऑपरेशन दिल और छाती के स्पेशलिस्ट डॉक्टर की देखरेख में किया जाने वाला ऑपरेशन है लेकिन इस ऑपरेशन को सर्जन डॉ. आशीष चाब्बा की टीम ने क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में कर दिखाया है। लिहाजा, अब ऑपरेशन के बाद मरीज बिल्कुल स्वस्थ है।

गिरने से पेट की आंतें लंगस में घुसीः जिला कुल्लू की बंजार घाटी के पेड़चा निवासी 35 वर्षीय टिकम राम मकान बनाने के लिए चट्टानें तोड़ने का काम कर रहा था कि वह अचानक गिर गया। जिससे उसके पेट में चोटें पहुंची और उसके पहले बंजार और उसके बाद क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू लाया गया। जहां डॉक्टर आशीष चाब्बा ने उसका उपचार किया लेकिन टिकम राम जो भी खाता वह उल्टियां कर बाहर निकाल देता। जिस कारण उसके भीतर क्या दिक्कत हो रही है इसका पता नहीं चल रहा था। डॉ. आशीष चाब्बा ने बताया कि मरीज का जब सी-टी स्कैन करवाया गया तो पता चला कि व्यक्ति के पेट की आंतें उसके लंग्स वाले डायफर्म में घुस गई है। जिस कारण व्यक्ति कुछ भी खा-पी नहीं पा रहा था। इसे विज्ञान की भाषा में डायफरमेटिक हार्निया कहा जाता है।

इस केस में पेट और लंग्स वाले हिस्से के बीच जो परत होती है वह एक तरफ से फट गई थी जहां से आंतें लेफ्ट लंग्स वाले क्षेत्र में घुस गई थी जिस कारण लेफ्ट साइड के फेफड़े ने काम करना बंद कर दिया था। अक्सर ऐसे केस में मरीजों को पीजीआई रेफर किया जाता है जहां कार्डिक स्पेशलिस्ट की देख रेख में ऑपरेशन किया जाता है।

मरीज की जान बचाना जरूरी था डॉ. आशीष चाब्बा, डॉ. राजीव और डॉ. सुशील की माने तो उनके पास कोई और चारा नहीं था। मरीज टिकम राम की माली हालत भी पीजीआई जाने के लायक नहीं थी और अगर उसे और देर ऐसे ही रखा जाता तो उसके लिए ये जानलेवा साबित हो सकता था। क्योंकि लेफ्ट साइड के फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया था। जिसके चलते आपस में विचार विमर्श करते हुए हमने टिकम राम का ऑपरेशन करने का निर्णय लिया।

अब स्वस्थ है टिकम राम करीब सवा एक घंटे के बाद ऑपरेशन सफल हुआ, डॉ. चाब्बा की माने तो उनके आज तक के करियर में इस तरह का यह पहला मामला था। हालांकि आईजीएमसी में यदा कदा इस तरह के ऑपरेशन ऑपरेट होते हैं लेकिन वे कार्डिक स्पेशलिस्ट की निगरानी में होते हैं लेकिन प्रदेश के दूसरे किसी भी अस्पताल में इस तरह के ऑपरेशन नहीं किए जाते हैं। अक्सर पीजीआई चंडीगढ़ में ऐसी सर्जरी कार्डिक और छाती के स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की देख रेख में होते हैं जिसके चलते उनके लिए यह काम बहुत बड़ी चुनौती से भरा हुए था।

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