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शहर के व्यापारियों ने ई-वे-बिल व्यवस्था का किया विरोध

3 वर्ष पहले
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भरतपुर | शहर व्यापार महासंघ की ओर से बैठक का भगवानदास बंसल की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में सरकार द्वारा राज्य की सीमाओं के अंदर ई-वे-विल की अनिवार्यता लागू करने पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि जीएसटी कौंसिल द्वारा राज्य की सीमाओं में ई-वे-विल जो अनिवार्य किया गया है। उसके लिए जो 10 किमी का एरिया निर्धारण किया गया है, जिससे व्यापार करना बड़ा मुश्किल हो जाएगा। क्योंकि शहर ही 20 किमी के एरिया में फैला हुआ है। इस कारण इंडस्ट्रीज एरिया से कोई माल सेवर अथवा कुम्हेर भेजने पर ई-वे-विल की आवश्यकता होगी, जोकि एक व्यापारिक दृष्टिकोण से बहुत मुश्किल लगता है। क्योंकि एक व्यापारी अगर थोक का काम करता है तो वह कागजों में ही जैसे बिल काटना एवं बिल लेना व उसको सबमिट करना, माल को भेजना, ये एक बहुत बडी प्रक्रिया हो जाएगी। वक्ताओं ने कहा कि शहर व्यापार महासंघ राज्य के अंदर होने वाली एवं ई-वे विल की व्यवस्था का पूर्ण रूप से विरोध करता है। उन्होंने बताया कि किसी अधिकारी द्वारा किसी किसी टेम्पो या रिक्शा या ट्रांसपोर्टरों के मालों को रोकने की कोशिश की गई तो स्पाट पर ही व्यापारियों द्वारा पूर्ण रूप से विरोध किया जाएगा, शर्तें कि नंबर एक का बिल होना अनिवार्य है। इस संबंध में जीएसटी कौंसिल, वित्त मंत्री भारत सरकार, कमिश्नर बिक्रीकर विभाग राजस्थान को ईमेल द्वारा विरोध दर्ज कर राज्य स्तरीय ई-वे-विल व्यवस्था को खत्म करने की मांग की जाएगी। बैठक में दामोदर गर्ग, मोहन मित्तल, विपुल शर्मा, मनीष मेहरा, वीरेंद्र अरोरा, राकेश मित्तल, प्रमोद बंसल सहित बड़ी संख्या में शहर के व्यापारी पदाधिकारी मौजूद थे। संचालन जिला मंत्री बंटू भाई ने किया।

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