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15 दिनों की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद 82 बच्चों को दिया गया पहला परम प्रसाद

3 वर्ष पहले
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धर्मप्रांत जशपुर में फरसाकानी पल्ली में 82 बच्चों को पहला परम प्रसाद दिया गया। लगभग 15 दिनों तक गहन प्रशिक्षण देने के बाद विशेष धर्मविधि के साथ इन प्रतिभागियों को पहली बार यीशु ख्रीस्त का शरीर, रक्त को रोटी एवं दाखरस के रूप में दिया गया।

कैथोलिक चर्च के मतानुसार सात संस्कार में से प्रथम बपतिस्मा संस्कार है जिसके पश्चात यूखीस्तीय संस्कार जहां परमप्रसाद का वितरण किया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान इन बच्चों ने पाप स्वीकार संस्कार में भी भाग लिया। इस अवसर पर संपन्न हुए मिस्सा समारोह का अनुष्ठान जम्मू कश्मीर धर्म प्रांत के पुरोहित फादर प्रेमफूल तिग्गा तथा सह अनुष्ठाता फादर प्रफुल बड़ा, फादर अभय मिंज, फादर डेबिट मिंज एवं फादर एग्नास तिग्गा द्वारा सम्पन्न कराया गया। धर्म विधि का शुभारंभ प्रारंभिक गीत एवं प्रतिभागियों के कतारबद्ध गिरजाघर में प्रवेश करने के साथ हुआ। तदुपरांत फरसाकानी पारिस के पल्ली पुरोहित फादर प्रफुल बड़ा द्वारा स्वागत संबोधन दिया गया। धर्म ग्रंथ से प्रथम पाठ अनुजा खलखो, दूसरा पाठ साहिल तिग्गा तथा सुसमाचार का पठन फादर अभय मिंज के द्वारा किया गया। प्रवचन में फादर प्रफुल बड़ा ने कहा कि परम प्रसाद हमारा आध्यात्मिक भोजन है।

यूख्रीस्तीय समारोह में भाग लेकर हम यीशु ख्रीस्त के शरीर और रक्त को रोटी और दाखरस के रूप में ग्रहण करते हैं। स्वयं यीशु ख्रीस्त ने कहा है मैं जीवन की रोटी हूं जो मेरे पास आता है उसे कभी भूख नहीं लगेगी और जो मुझ में विश्वास करता है उसे कभी प्यास नहीं लगेगी यीशु ख्रीस्त ने अपने मृत्यु के एक दिन पूर्व अपने शिष्यों के साथ भोजन करते समय रोटी लेकर कहा तुम सब इसे लो और खाओ यह मेरा मांस है तथा दाखरस भरा कटोरा लेकर कहा इसे लो और पीयो यह मेरा रक्त है। उसी की स्मृति में जब भी मिस्सा पूजा का अनुष्ठान किया जाता है गेहूं की रोटी एवं दाखरस यीशु के शरीर और रक्त में बदल जाता है और उन्हें विश्वासी भक्तों के लिए प्रदान किया जाता है। आज ये बच्चे पहली बार इसे ग्रहण कर रहे हैं। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में बच्चों को प्रशिक्षण देने में ब्रदर अश्विन खलखो, सिस्टर आइलिन् किस्पोट्टा, सिस्टर संगीता, प्रचारक मार्शल मिंज, प्रचारक नोरबर्ट कुजूर, कुमारी सृष्टि मिंज, कुमारी पूनम मिंज, पल्ली पुरोहित फादर प्रफुल्ल बड़ा, सहायक पल्ली पुरोहित फादर एग्नास तिग्गा, एवं धर्मबहनों ने विशेष योगदान दिया।

15 दिन के प्रशिक्षण में शामिल होने के लिए आए मसीही समाज के बच्चे।

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